लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य समेत ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी का असर अब दिखने लगा है। संघर्ष विराम को लेकर इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकाबंदी का ऐलान किया और चेतावनी दी कि किसी भी संदिग्ध जहाज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि ताजा घटनाक्रम में संकेत मिले हैं कि ईरान का रुख कुछ नरम पड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच फिर से वार्ता की संभावना बन रही है और गुरुवार को बातचीत हो सकती है।
जेडी वेंस ने कहा कि अब पहल ईरान को करनी होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान सकारात्मक रुख अपनाता है, तो बड़ा समझौता संभव है।
सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद में अमेरिका ने ईरान को 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था, जबकि ईरान ने इसके जवाब में 5 साल का प्रस्ताव रखा है।
मध्यस्थ देशों के प्रयास भी तेज हो गए हैं, ताकि 21 अप्रैल को समाप्त होने वाले संघर्ष विराम से पहले समाधान निकाला जा सके। बातचीत के लिए जिनेवा और इस्लामाबाद दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
इस बीच रूस ने भी इस मुद्दे में दिलचस्पी दिखाई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम को स्वीकार करने का प्रस्ताव अब भी खुला है।
वहीं, क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए मार्को रुबियो और अन्य राजनयिकों की अहम बैठकें भी प्रस्तावित हैं, जिनमें इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन इस पूरे विवाद के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।