लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
इस्लामाबाद: पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता में मध्यस्थ या सहयोगी भूमिका निभाने की संभावनाएं तलाश रहा है। हालिया क्षेत्रीय तनाव और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाने में जुटा हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार की औपचारिक वार्ता शुरू होती है, तो पाकिस्तान स्वयं को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और ईरान के साथ साझा सीमा उसे इस प्रक्रिया में एक संभावित भूमिका प्रदान करती है।
पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की नीति पर काम करता रहा है। ऐसे में इस्लामाबाद की कोशिश है कि वह दोनों देशों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने वाले पक्ष के रूप में अपनी पहचान मजबूत करे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह प्रयास केवल क्षेत्रीय स्थिरता तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक महत्व को बढ़ाने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में आर्थिक चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों के बीच पाकिस्तान वैश्विक मंच पर अपनी सक्रिय भूमिका दिखाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि अमेरिका और ईरान की ओर से पाकिस्तान को किसी औपचारिक मध्यस्थ भूमिका देने संबंधी कोई घोषणा नहीं की गई है। फिर भी कूटनीतिक हलकों में इस संभावना को लेकर चर्चा जारी है कि भविष्य में क्षेत्रीय देशों की भागीदारी वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान संबंधों में किसी भी सकारात्मक प्रगति का असर पूरे पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया क्षेत्र की सुरक्षा तथा आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।