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भारतीय एथलेटिक दूती चन्द ने अपने समलैंगिक संबंध को दी हरी झंडी

Deepak Chauhan 22-05-2019 14:58:43



आज  समय में हर व्यक्ति को अपनी पसंद और नापसंद से चीजे करना उसका अपना अधिकार है। इस अधिकार के साथ ही व्यक्ति न सिर्फ अपने कामो को अपितु अपने जीवन साथी को भी अपनी ही आतंरिक मन की ख़ुशी के अनुसार ही चुन सकता है। फिर भले ही व्यक्ति अपने समान लिंग वाले व्यक्ति को ही क्यों ना अपने साथी के रूप में चुने। ये अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने भी व्यक्ति को उसकी अपनी अभिव्यक्ति को आधार मानते हुए पास किया। इन्ही बातो के चलते भारतीय एथलेटिक महिला धावक दूती चन्दने अपने समलैंगिक सबंध को सार्जनिक झंडी दी। कुछ दिन पहले दुती चांद ने सार्वजनिक तौर पर अपने समलैंगिक होने की बात बताई. इसके बाद उनका एक और बयान आया जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बात अपनी बहन के बढ़ते दबाव के चलते सार्वजनिक की। 

दूती चन्द पहली भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने अपने समलैंगिक संबंध के बारे में सार्वजनिक तौर पर बयान दिया है. दुती 100 मीटर में रिकॉर्ड बना चुकी हैं और साल 2018 एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीतने वाली भारतीय एथलीट हैं। 


खेल से अलग हॉर्मोन की वजह से रही थीं चर्चा में

इससे पहले शरीर में अधिक पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) होने की वजह से भी वो चर्चा में आ गई थीं. टेस्टोस्टेरोन वो हार्मोन है जो पुरुषोचित गुणों को नियंत्रित करता है। इस वजह से उन्हें जुलाई 2014 में ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों के कुछ दिन पहले ही अयोग्य क़रार दिया गया था।  इस स्थिति को हाइपरएंड्रोजेनिज़्म कहते हैं। हालांकि सर्वोच्च खेल अदालत यानी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने दुती के पक्ष में फ़ैसला सुनाया जिसके बाद उन्होंने रिओ ओलिंपिक और दूसरी बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। 

लेकिन इस जिस वजह से वो चर्चा में हैं उस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं. एक वर्ग ऐसा है जो उनके संबंधों पर अचरज कर रहा है वहीं एक ऐसा भी है जिसका मानना है कि एक लोकप्रिय एथलीट का इस तरह अपने समलैंगिक संबंध पर खुलकर बोलना अपने आप में एक बड़ा संदेश है. यह क़दम बहादुरी भरा है और इसकी सराहना होनी चाहिए। 


लेकिन इस कहानी की शुरुआत कहां से हुई?

ओडिशा के जाजपुर ज़िले के चक गोपालपुर गांव में जन्मीं दुती बताती हैं कि वो इस रिश्ते में पिछले तीन-चार साल से हैं। उनकी पार्टर भी इसी गांव की रहने वाली हैं और दोनों बचपन की दोस्त हैं. यह गांव बुनकरों का गांव हैं. दुती बताती हैं कि दोनों घरों के बीच पारिवारिक रिश्ता है। दुती बताती हैं कि उनकी पार्टनर ने उन्हें पहले प्रपोज़ किया था। 

"वो मुझे बतौर स्पोर्ट्स स्टार बहुत पसंद करती हैं. मुश्किल समय में उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया और हमेशा हौसला बढ़ाया. वो हर इवेंट से पहले मेरे लिए पूजा करती है और मेरे लिए दुआ मांगती है. "

दुती बताती हैं कि अगर वो यह कहें कि उनकी सफलता में उनकी पार्टर का भी हिस्सा है तो यह बिल्कुल ग़लत नहीं होगा.


लेकिन जब लोगों को इस बारे में पता चला?

दुती कहती हैं कि पहले तो यह बात उन दोनों के बीच ही थी लेकिन धीरे-धीरे यह बात गांववालों को दोनों के संबंधों के बारे में पता चल गया। गांववालों ने इस संबंध को स्वीकार नहीं किया और अब हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि दुती और उनकी पार्टनर का गांव में रहना मुश्किल हो गया है। लेकिन दुती का कहना है कि उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि किसी भी दूसरे को उनके रिश्ते को लेकर क्या परेशानी हो सकती है?

वो कहती हैं "इसमें कुछ भी ग़लत तो नहीं है, फिर छिपाना क्यों ?"

दुती बताती हैं कि उन्होंने सोचा कि जब सभी को पता चल ही चुका है तो अब इसे छिपाने की कोई ज़रूरत नहीं. क्योंकि इसमें कुछ बी ग़लत नहीं.


परिवार साथ नहीं दे रहा

दुती बताती हैं कि इस संबंध को लेकर नाराज़गी सिर्फ़ बाहरी लोगों को नहीं है। उनकी बड़ी बहन सरस्वती और माँ भी इस रिश्ते से नाराज़ हैं. हालांकि शुरुआती दिनों में उन्हें इस पर कोई एतराज़ नहीं था लेकिन अब वो लोग नहीं चाहते कि दुती इस रिश्ते में आगे बढ़ें। अपने संबंध को सार्वजनिक करने के बाद बीते मंगलवार को दुती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। उन्होंने अपनी बहन पर आरोप लगाए कि वो उन्हें घर से निकालने की धमकी दे रही हैं. हालांकि उनकी बड़ी सरस्वती इन सभी आरोपों की खंडन कर रही हैं. उन्होंने दुती को सलाह देते हुए कहा कि वो फिलहाल सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान दें। 

वहीं दुती की माँ, आखोजी चांद का कहना है कि दुती अब घर नहीं आतीं और घर चलाने के लिए पैसा भी नहीं देती। उनका कहना है कि वो इस रिश्ते को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगी। वहीं दुती अब सिर्फ़ ओलंपिक खेलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं। दुती ने मीडिया से कहा,"मैं अभी सिर्फ 23 साल की हूं, तो इतनी जल्दी शादी के बारे में नहीं सोच रहीं. अभी मेरा सारा ध्यान टोक्यो ओलंपिक पर है इसके लिए मैं कड़ी मेहनत भी कर रही हूं. ओलंपिक्स के बाद ही मैं इस बारे में सोचूंगी."

वो कहती हैं प्यार सच्चा और गहरा हो तो कठिनाइयों से लड़ने का हौसला मिल जाता है. दिल एक ही बार दिया जाता है और मैं दे चुकी हूं. अब कोई कितना भी विरोध करे मैं अपने फ़ैसले पर अटल हूं.

वो कहती हैं "कई बार एक लड़के और लड़की की शादी को भी समाज स्वीकार नहीं करता है यहां तो बात दो लड़कियों की है. ऐसे में मुश्किल आना तो स्वभाविक है, इससे क्या डरना."

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