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मैं भी इंसान हु मुझे क्यों बेचा और नोंचा जाता है

Deepak Chauhan 13-05-2019 16:28:52



आपको  उस ज़माने के बारे में याद तो होगा ही जब किसी लड़की की शादी उसकी मर्जी के बिना या लड़के वालों से महज़ चाँद रूपए लेकर उसे शादी के नाम पर बेच दिया जाता था। इसी बात को लेकर अगर हम आपको ये कहे की आज भी कई ऐसे जगह देखा जा सकता है की जहाँ पर लड़की को बिलकुल उसी समय के अनुसार ही बिना उसकी मर्जी जाने चंद रुपए लेकर शादी के नाम पर बेचा गया। जी ये कहानी है हरियाणा के फरीदाबाद की एक नाबालिग दलित लड़की का आरोप है कि अपहरण करने के बाद डेढ़ लाख रुपये में उसका सौदा कर जबरन शादी करवाई गई, जिसके बाद लगातार बलात्कार हुआ.


‘मैं एक लड़की हूं, लेकिन मुझे मवेशियों की तरह बेचा गया और मेरे शरीर को नोचा गया. मेरी शादी भी जबरन करवाई गई. जिससे शादी करवाई गई, उसने तो मेरे साथ बलात्कार किया ही, उसके छोटे भाई ने भी मेरे साथ बलात्कार किया. दोनों भाई बारी-बारी से मेरा बलात्कार करते थे.’

यह कहना है हरियाणा के फरीदाबाद की 17 वर्षीय नेहा (परिवर्तित नाम) का, जिनका आरोप है कि उसे तीन महीनों तक बंधक बनाकर रखा गया, लगातार बलात्कार किया गया और डेढ़ लाख रुपये में बेच कर उसकी जबरन शादी करवाई गई.

नेहा के परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस में मामला जाने के बाद अब आरोपियों के परिजनों द्वारा धमकाकर मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है.

नेहा ने बताया कि मामले की शुरुआत 24 अगस्त 2018 की शाम को तब हुई, जब वह एक पहचान वाले व्यक्ति से मिलने गई थीं. नेहा इस शख्श विनोद उर्फ विनय गुर्जर को दो महीने से जानती थीं और उसने नेहा से शादी का वादा किया था.

उन्होंने बताया, ‘उस शाम विनय ने मुझे फरीदाबाद के आकाश होटल के बाहर मिलने बुलाया और वहां से मुझे कार में बैठाकर अपने दफ्तर ले गया. वहां ले जाकर उसने मुझे जबरन शराब पिलाई और बलात्कार किया.’

नेहा के परिजन बताते हैं कि नेहा 24 अगस्त की शाम घर से बाहर गई थी और वापस नहीं लौटी. इस बारे में परिवार ने फरीदाबाद कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. नेहा के फूफा विजय (परिवर्तित नाम) बताते हैं कि इसके बाद 20 नवंबर को उनकी बेटी पलवल में मिलीं.


नेहा की आपबीती

नेहा का आरोप है कि इन तीन महीनों के दौरान उसे अलग-अलग जगहों पर बंधक बनकर रखा गया, नियमित रूप से अलग-अलग लोगों ने बलात्कार किया और यातनाएं दी गईं. नेहा का यह भी आरोप है कि उसे पलवल के एक तुमसरा गांव में डेढ़ लाख रुपये में बेचकर जबरन शादी करवाई गई.

उसने बताया, ‘फरीदाबाद के दफ्तर में विनय ने मुझे करीब डेढ़ महीने तक बंधक बनाकर रखा. इस दौरान वो मुझे हर दिन जबरदस्ती शराब पिलाता. इसके बाद नशे की हालत में मेरे साथ बलात्कार होता था.’

नेहा ने बताया, ‘मुझे कुछ समझ नहीं आता था कि मेरे साथ क्या हो रहा है और कौन क्या कर रहा है. मुझे सिर्फ ये समझ में आता था कि मेरे साथ गलत काम हो रहा है. मुझे बंद कर के रखा जाता था.’

नेहा का कहना है कि इसके बाद उन्हें जसाना गांव के एक दंपत्ति के हवाले कर दिया गया, जहां उसे बंधक बनाकर रखा गया और दुर्व्यवहार किया गया.

उन्होंने बताया, ‘करीब डेढ़ महीने अपने पास रखने के बाद विनय ने मुझे जसाना गांव के विजेंद्र उर्फ हल्लन को सौंप दिया, जहां उसके घर पर मुझे 8 दिन बंधक बनाकर रखा गया. वहां उसकी पत्नी मिथिलेश भी थी, जो मेरे साथ दुर्व्यवहार करती थी. एक समय खाने को देते थे और बाकी टाइम कमरे में बंद रखते थे. एक दिन मैंने सुना कि वो पलवल में कहीं डेढ़ लाख रुपये में मेरा सौदा करने वाले हैं.’


नेहा ने हल्लन के घर बुरा व्यवहार होने की बात कही, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यहां उसके साथ बलात्कार या कोई यौन दुर्व्यव्हार नहीं किया गया.


हरियाणा और मोल की बहू का चलन

महिला सुरक्षा और बेटी बचाओ के नारों के बीच हरियाणा की एक सच्चाई राज्य का लैंगिक अनुपात सामने रखता है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 1000 पुरुषों पर 879 महिलाएं थीं, जो 940 के राष्ट्रीय औसत से काफी कम है.

बीते एक दशक में राज्य में बाहरी राज्यों से लड़कियां लाकर या जबरन शादी करने का चलन अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है. कई शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि ख़राब लैंगिक दर ही राज्य में होने वाले विवाहों को प्रभावित करती है और यह जबरन या खरीदकर लाई गई महिलाओं से शादी के रूप में सामने आता है.

हरियाणा में ‘मोल की बहू’ या ‘पारो’ शब्द ऐसी ही महिलाओं के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. 2013 के एक अध्ययन के अनुसार 10,000 घरों पर किए गए एक सर्वे में सामने आया था कि राज्य में करीब 9,000 शादीशुदा महिलाएं बाहरी राज्यों से लाई गयी थीं.

इस तरह की शादियां और महिलाओं की तस्करी भारतीय कानून की नजर में अपराध की श्रेणी में आती हैं, लेकिन फिर भी ऐसा लगातार हो रहा है और समय-समय पर मीडिया ऐसी महिलाओं की प्रताड़ना की दास्तान सामने रखता है.

जबरन शादियों के अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में भी हरियाणा का रिकॉर्ड कुछ बेहतर नहीं है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2016 की रिपोर्ट में सामूहिक बलात्कार के मामलों में हरियाणा शीर्ष पर था.

इस रिपोर्ट में बताया गया था कि राज्य में हर दो दिन में एक सामूहिक बलात्कार होता है. नेहा की आपबीती इन्हीं आंकड़ों की पुष्टि करती दिखाई देती है.

नेहा ने आगे बताया कि जसाना गांव से हल्लन उसे गुरुग्राम लेकर गया जहां किसी मंदिर में जबरन उसकी शादी पलवल के तुमसर गांव के जसबीर से करवाई गई. इस शादी के समय उसकी उम्र 19 साल बताई गयी और यह भी कहा गया कि वह पंजाबी है.

शादी के दौरान हल्लन के अलावा जसबीर की बहन सरिता भी मौजूद थीं. नेहा का यह भी कहना है कि इसके एवज में जसबीर ने हल्लन को डेढ़ लाख रुपये दिए थे. इसके बाद उसे जसबीर के गांव तुमसर ले जाया गया। नेहा बताती हैं कि यहां उसके उत्पीड़न की एक अलग कहानी शुरू हुई. जसबीर के घर में उसकी मां दयावती और भाई राहुल रहते थे. नेहा बताती हैं कि जसबीर उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता था. इसके अलावा उसका छोटा भाई राहुल भी उसके साथ बलात्कार करता था। 

नेहा बताती हैं, ‘दोनों भाई बारी-बारी से मेरे साथ जबरदस्ती करते थे. मेरे साथ मारपीट की जाती. मैं उनकी मां दयावती से कहती मुझे घर जाना है तो वो मेरी नहीं सुनती. मुझे पीटा जाता. हर बात पर एक ही जवाब होता था कि तुझे तो खरीदकर लाए हैं, पहले डेढ़ लाख रुपये दे, फिर जा, जहां जाना है.’नेहा ने बताया कि ऐसे ही चलता रहा कि एक दिन (20 नवंबर को) उसने चोरी-छिपे दयावती के फोन से 100 नंबर डायल कर पुलिस को बुला लिया. लेकिन पुलिस के पहुंचने पर दयावती ने पति-पत्नी का आपसी झगड़ा बताकर उन्हें वापस लौटाने की कोशिश की। इस बीच नेहा ने अपने हाथ की नस काटने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस वहां रुकी और नेहा से पूछताछ की. नेहा की आपबीती सुनकर उसके कहने पर पुलिस ने पलवल में ही रहने वाले नेहा के फूफा विजय को फोन कर बुलाया। विजय बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने पलवल पुलिस को बताया कि नेहा 24 अगस्त से लापता थी और उसे अपने घर ले गए. इसके साथ ही फरीदाबाद पुलिस को भी सूचित किया गया, जहां 21 नवंबर को नेहा को बुलाकर उसका बयान लिया गया। 

इसी शाम एसपी और मजिस्ट्रेट के सामने उसका बयान दर्ज हुआ, साथ ही मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया.

नेहा ने अपनी शिकायत में विनय, हल्लन, उसकी पत्नी मिथिलेश, जसबीर, उसके भाई राहुल और मां दयावती का नाम लिया है. फरीदाबाद पुलिस ने 23 नवंबर को राहुल को गिरफ्तार कर लिया था और अब तक वह पुलिस हिरासत में है। पुलिस को दिए बयान में राहुल ने इस बात को कबूला है कि नेहा से जसबीर की शादी के लिए हल्लन को डेढ़ लाख रुपये दिए गए थे. साथ ही उसने यह भी स्वीकारा कि जसबीर और वो नेहा के साथ बलात्कार किया करते थे, जिसमें उनकी मां दयावती भी साथ देती थी। पुलिस का कहना है कि अन्य सभी आरोपी फरार हैं. पुलिस ने राहुल के खिलाफ आरोपपत्र भी दायर कर दिया है, जिसमें उस पर पोक्सो एक्ट की धारा छह सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण), 366ए (नाबालिग लड़की को बंधक बनाना), 370 (मानव तस्करी– दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना), 342 (ग़लत तरीके से प्रतिबंधित करने के लिए दंड) और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.


पुलिस का ‘असहयोग’ और आरोपियों की धमकियां

नेहा की मां बताती हैं कि उनके पति मैकेनिक का काम करते हैं और बमुश्किल महीने के 8-9 हज़ार रुपये कमाते हैं. उन्होंने बताया, ‘जब अगस्त की उस शाम नेहा नहीं लौटी तब हमने उसी शाम फरीदाबाद कोतवाली में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस ने एफआईआर 15 सितंबर को दर्ज की.’

वे कहती हैं, ‘हम ने तो सोचा कि न जाने हमारी बेटी कहां चली गई, क्या हो गया, लेकिन जब इसके फूफा ने हमको बताया कि ये मिल गई है और इसके साथ ये सब हुआ, तो हमारे पैरों के तले ज़मीन ख़िसक गई. हम अब कुछ नहीं चाहते बस हमको न्याय चाहिए. और पुलिस ने हमारी बच्ची नहीं ढूंढी बल्कि संयोग से वो मिल गई. उसके साथ इतना ज़ुल्म हुआ और प्रशासन उसको न्याय दिलाना की नीयत नहीं रखता है. उसके पिता इस घटना के बाद टूट चुके हैं और शराब के नशे में रहते हैं. हमें तो बस न्याय चाहिए और दोषियों को सज़ा दिलवानी है.’

विजय बताते हैं, ‘जब से ये मामला पुलिस के संज्ञान में आया, तब से मैं समझ चुका था कि नेहा अब सुरक्षित नहीं है और इसलिए मैंने उसे, उसके घरवालों को अपने घर बुला लिया और किसी को बताया नहीं. पर पता नहीं कैसे उन लोगों को मेरे दफ्तर का पता पड़ गया और वो वहां भी आने लगे. पहले तो मामला निपटाने के लिए बोलते थे, फिर हल्लन की बीवी मिथिलेश एक दिन दफ्तर आई और कहने लगी कि मेरे पति का नाम वापस ले लो वरना मैं जहर खा लूंगी.’

नेहा की मां कहती हैं, ‘हम अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं क्योंकि वे लोग हमें धमका रहे हैं. आरोपी फरीदाबाद के रसूखदार परिवारों से हैं और जिसके चलते हमारा घर लौटना खतरे से खाली नहीं है. जब तक वे सभी गिरफ्तार नहीं हो जाते, तब तक हमारा घर लौटना मुमकिन नहीं है.’

विजय बताते हैं, ‘आरोपी विनय का जीजा, जो टीगांव का सरपंच है, वो भी कुछ लोगों के साथ मेरे दफ्तर आकर धमकी भरे लहज़े में मामला वापस लेने का दबाव बनाता रहा. वे ले-देकर मामले को ख़त्म करने की बात करते थे.’

उन्होंने बताया, ‘एक बार पुलिस ने निशानदेही करने के लिए फरीदाबाद थाने बुलाया और इसके बाद हमारी गैर-मौजूदगी में 10-15 आदमी हमारे घर पलवल पहुंच गए. ये सिलसिला रुका नहीं बल्कि जब-जब हम पुलिस के पास मामले के बारे में बात करने जाते थे, तो उसी समय 20-25 आदमी हमारे घर पहुंच जाते.’

विजय का कहना है, ‘फरीदाबाद में नेहा का घर जिस इलाके में है, वह गुर्जर बहुल इलाका है और आरोपी भी उसी समुदाय से हैं. हम दलित समाज से हैं और ऐसे में उस इलाके में भी जाने से डर लगता है.’नेहा के परिजनों ने पुलिस के असहयोग भरे रवैये पर भी सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रही है। उन्होंने बताया है कि जब उन्होंने फरीदाबाद कोतवाली में एफआईआर और मेडिकल जांच की कॉपी मांगी तब इंस्पेक्टर मुकेश ने उसे देने से इनकार कर दिया. परिजनों के जोर देने पर उन्होंने कहा कि जाओ कोर्ट से ले लो, यहां नहीं मिलेगा। वे बताते हैं कि इसके बाद एक स्थानीय वकील को लेकर थाने गए और पुलिस से एफआईआर, मेडिकल जांच और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान की कॉपी मांगी, तो पुलिस ने वकील को भी कॉपी देने से मना कर दिया। 


परिवार वालो का कहना 

नेहा के परिवार वालों का कहना है कि वे नेहा की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. विजय कहते हैं, ‘हमें अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए बहुत ख़तरा महसूस हो रहा है. पुलिस का रवैया इस मामले में बेहद लचर है और उनकी न्याय देने की नीयत नहीं दिखती।' परिवार का कहना है क्योंकि आरोपी पैसे वाले और रसूखदार परिवार से हैं, इसलिए उनके मामले में पुलिस उस तरह से काम नहीं कर रही है, जैसा उसे करना चाहिए. साथ ही उनका यह भी आरोप है कि मामले से आरोपी महिलाओं का नाम निकाला जा रहा है। फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने 29 जनवरी को नेहा के परिजनों से मुलाकात की थी. परिवार का कहना है कि उन्होंने न्याय का आश्वासन दिया है और महिलाओं का नाम मामले से निकाले जाने की बात पर जांच करने की बात कही है। हालांकि इस बीच यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि राहुल के अलावा किन लोगों को एफआईआर में आरोपी बनाया गया है.नेहा के फूफा विजय ने बताया कि फरीदाबाद कोतवाली के एसएचओ भारत भूषण और एसीपी (महिला सेल) पूजा डावला ने एफआईआर और मेडिकल जांच की कॉपी साझा करने से यह कहकर इनकार किया कि गुमशुदगी की एफआईआर में जो भी जोड़ा गया है, वो पुलिस डायरी का हिस्सा है, जिसे साझा नहीं किया जा सकता। 


 एफआईआर देने से किया पुलिस ने इनकार

जब द वायर  द्वारा फरीदाबाद पुलिस से एफआईआर की कॉपी मांगी गई, तब इससे इनकार कर दिया गया। फरीदाबाद कोतवाली के एसएचओ भारत भूषण ने द वायर  से बात करते हुए कहा, ‘हम अभी मामले की जांच कर रहे हैं और इस मामले को लेकर एक एसआईटी का गठन भी किया गया है. मामले में एक आरोपी राहुल की गिरफ्तारी हुई और उसकी चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है।' उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366ए, 376डी (गैंगरेप), 370,धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), पोक्सो एक्ट और एससी/एसटी के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

इंस्पेक्टर भारत भूषण का कहना है कि सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ वारंट निकाला जा चुका है, वे सभी फरार हैं और पुलिस तलाश कर रही है। 

हालांकि उन्होंने भी इस बारे में जानकारी नहीं दी कि किन-किन लोगों को आरोपी बनाया गया है. उन्होंने कहा कि मामला एसीपी पूजा डावला को सौंपा गया है और बाकी जानकारी उनसे ली जा सकती है। मिडिया द्वारा जब एसीपी पूजा डावला से संपर्क किया गया तब पहले उन्होंने यह कहते हुए बात करने से मना कर दिया कि ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग नहीं की जा सकती। जब उन्हें बताया गया कि सरकार का दिशानिर्देश पीड़िता और उसके परिजनों की पहचान की गोपनीयता को लेकर है, मामले को लेकर नहीं तब उन्होंने कहा, ‘हमने एसआईटी का गठन किया है और हर रोज छापे मार रहे हैं. सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’

डावला से एफआईआर के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘जो पहली गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई गई थी, वो सार्वजनिक है. बाकी पूरे मामले को पुलिस डायरी में लिखा गया है और उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है.’उनसे जब आरोपियों के नामों की पुष्टि करने को कहा गया, तब उन्होंने कहा कि पीड़िता ने जिन लोगों का नाम लिया है, उन सभी की जांच की जा रही है .

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