निरमंड के नोर पंचायत का चार दशक पुराना भवन जलकर स्वाहा अब तैयार है हवा से बनी दुनिया की पहली कार्बन निगेटिव वोदका हर 5 में से 2 कर्मचारी तबीयत का बहाना लेकर लेते है बॉस से छुट्टी कमाल का बैलेंस : ये है बैलेंसराज जो किसी भी चीज को किसी पर भी बैलेंस करदे सिर्फ आतंक ही नहीं, एड्स जैसी बीमारी से भी गंभीर रूप से ग्रस्त है पाकिस्तान हार्दिक पांडया ने कही टीम मे अपनी वापसी को लेकर कुछ बाते जाने कब से ऑर क्यूँ मनाया जाता है World Human Rights Day डर लगता है पापा अब मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे तब उन्होंने प्याज की बढ़ती कीमतों पर चिंता की थी : शिव सेना परिजनों ओर पुलिस के उत्पीड़न मे शमी की सहमति : हसीन जहां फिल्म पानीपत को लेकर भडक उठे जाट, वर्ल्ड स्क्वैयर मॉल पर प्रदर्शन, फिल्म बन्द कराई रत्नो का खेल समझने वाले खिलाड़ी है आचार्य अजय शर्मा और रत्नो की बड़ी पाठशाला है उनका गंगाराम राशि रत्न केंद्र स्प्लिट्सविला मे आए गौरव आज गौरी बन बिखेरते है जलवे आखिर क्यूँ चर्चा मे वाराणसी का पहला समलैंगिक विवाह ? उपहार सिनेमा के बाद एक बार फिर झुलसी दिल्ली, 43 की मौत 629 लड़कियां चीन को बेच ऑर नीचे गिरा पाकिस्तान संस्कृति विवि में तीन दिवसीय एंटरप्रिन्योरशिप प्रोग्राम में बोले अतिथि Bigg Boss 13: घर से बेघर होने के बाद देवोलीना ने खोला रश्मि का राज़ कर्नाटक में उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी प्रियंका चोपड़ा को मानवतावादी पुरस्कार मिलने पर पति निक जोंस ने जताई ख़ुशी

पहले सूखे से परेशान थे, अब बाढ़ से जूझ रहे हैं ये राज्य

Khushboo Diwakar 17-07-2019 16:01:07



हैरत होती है प्रकृति के बदलते तेवर देख कर. अभी डेढ़ महीने पहले जिन राज्यों में सूखा था अब वहीं पर बाढ़ आई हुई है. ड्रॉट अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (DEWS) की मानें तो 14 जुलाई तक देश का 41.41 फीसदी हिस्सा सूखाग्रस्त है. जबकि, एक महीने पहले यानी 14 जून को देश का 45.11 प्रतिशत इलाका सूखे की चपेट में था. यह सब हुआ मॉनसून के देरी से आने की वजह से. भारतीय मौसम विभाग की मानें तो 65 सालों में दूसरी बार ऐसा हुआ है कि भारत में मॉनसून आने से पहले इतना भयावह सूखा पड़ा. मार्च से मई के बीच सिर्फ 99 मिमी बारिश हुई है. यानी सामान्य से 23 फीसदी कम बारिश.

ड़ेढ-दो महीने पहले बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुड्डूचेरी, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सूखे और गर्मी से परेशान थे. यानी देश के 13 राज्यों की करीब 42 फीसदी आबादी इस प्राकृतिक आपदा से संघर्ष कर रही थी. लेकिन मौसम बदलने के साथ ही इनमें से कई राज्यों में नई मुसीबत आन पड़ी. इस मुसीबत का नाम है बाढ़.

बाढ़ से पानी-पानी हुए देश के कई राज्य

बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में पहले सूखा पड़ा, अब बाढ़ के हालात हैं. वहीं, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी में भारी बारिश हो रही है. बिहार-असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बाढ़ से अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 70 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की वजह से प्रभावित हैं. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है. इसकी वजह से राज्य के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं.

उत्तराखंड में भारी बारिश से कई जिलों में लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. राज्य में ऑरेंज अलर्ट जारी है. 15 जुलाई को भूस्खलन से गंगोत्री हाईवे बाधित रहा. चारधाम यात्रा रूट और इससे लगे इलाकों में बारिश विपदा बनकर टूट रही है. बारिश से सड़क बंद होने के साथ ही भूस्खलन, भू-धंसाव, कटाव, नदी के ऊफान जैसी घटनाएं बढ़ने लगी हैं.

सूखे का सबसे बड़ा उदाहरण बना चेन्नई, चेरापूंजी

2015 में चेन्नई में भयानक बाढ़ आई थी. लेकिन इस बार गर्मी में 1.10 करोड़ लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ा. चार में से तीन जलस्रोत सूख गए. लाखों लोगों की प्यास बुझाने के लिए पानी के टैंकर्स और ट्रेन का सहारा लेना पड़ा. दुनिया का सबसे ज्यादा गीला कहे जाना वाला इलाका चेरापूंजी में पिछले कुछ सालों से सर्दियों के मौसम में सूखा पड़ रहा है. दिल्ली और बेंगलुरु में तो अगले साल तक भूजल खत्म होने की चेतावनी दी गई है.


Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :