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ऐतिहासिक घटनाक्रमों के लिए याद किया जाएगा वर्ष 2019

लेखक सौरभ त्रिपाठी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दो के जानकार हैं जो बताते है की हम सिर्फ अपने जीवन बल्कि अपने देश में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने की उम्मीद करते हैं जिसकी पृष्ठभूमि 2019 में लिखी जा चुकी है, वर्ष 2019 भारतीय इतिहास में एक ऐसे काल खंड के रूप

Deepak Chauhan 31-12-2019 16:45:32



नया वर्ष हर बार नई ऊर्जा उमंग और संभावनाओं को लेकर हमारे जीवन में आता है, यह वह समय होता है जब हर व्यक्ति अपनी पुरानी बातों को भूलकर एक नई उम्मीद और आशा के साथ नए वर्ष का स्वागत करना चाहता है।  किसी के लिए बीता वर्ष अच्छा गुज़रता है तो किसी के लिए बुरा, परन्तु दोनों ही अपेक्षा रखते हैं कि नया वर्ष अच्छा होगा। 

आज हम वर्ष 2020 में हैं और इसका भी स्वागत नई अपेक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं के साथ किया है जिसमें ना हम सिर्फ अपने जीवन  बल्कि अपने देश में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने की उम्मीद करते हैं जिसकी पृष्ठभूमि 2019 में लिखी जा चुकी है, वर्ष 2019 भारतीय इतिहास में एक ऐसे काल खंड  के रूप में याद किया जाएगा जिसमें देश ने क्रन्तिकारी घटनाक्रम देखे, चिरकालीन समस्याओं का ऐतिहासिक समाधान देखा और नए भारत के संकल्प को पूरा करने की दिशा में वह योजनाएं तय हुईं जिसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम होंगे। 

2019 8, जनवरी को केंद्र सरकार ने लोकसभा में गरीब अगड़ो को 10 फीसदी आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक पेश किया इसके अंतर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े सभी धर्म के लोगों को लाभ मिलेगा, इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।

फरवरी में विश्व को नए भारत का वह स्वरूप देखा जिसने दुनिया को सन्देश दिया कि अब भारत किसी भी सूरत पर आतंक को बर्दाश्त नहीं करेगा जब 14 फरवरी 2019 को देश में ऐसी घटना घटी, जिसने पुरे देश को झकझोर के रख दिया जब, जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय सुरक्षा कर्मियों को ले जाने वाले सी०आर०पी०एफ० के वाहनों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 45 जवानो  की जान गयी थी, जिसकी जिम्मेदारी आतंकी संगठन , जैश-ए-मोहम्मद ने ली और जिसकी रूपरेखा  पडोसी देश पाकिस्तान में तैयार  हुई ।

इस घटना से  पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी। इस हृदय विदारक घटना को लेकर जहां हर बार की तरह इस बार भी  पाकिस्तान अपनी सफाई देने में जुटा है, वहीं भारत के मित्र देशों ने हमले की कड़ी निंदा की, इस घटना पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना को अंजाम देने वालो को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी, और प्रतिउत्तर में 26 फरवरी, को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करके जैश-ए-मोहम्मद के संचालित आतंकी शिविर को नष्ट कर दिया जिसमें उसके 300 से भी ज्यादा आतंकी मारे गए। 

इस घटना के दो दिन बाद, 26 फरवरी 2019 को सीमा पर गतिरोध रोकते हुए  भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान का मिग-21 फाइटर प्लेन पाकिस्तान की सीमा में जा गिरा, जहां उन्हें युद्ध बंदी बना लिया गया, सारा देश जहां अभिनंदन की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहा था वही केंद्र सरकार ने अपनी सशक्त विदेशी नीति द्वारा वैश्विक स्तर न सिर्फ पाकिस्तान को अलग थलग कर दिया बल्कि उस पर दबाव बनाकर उन्हें विंग कमांडर अभिनंदन को सकुशल वापस भारत भेजने के लिए बाध्य कर दिया। 

मई 2019 में देश ने अभूतपूर्व आम चुनाव परिणाम देखे जब किसी सत्तारूढ़ दल को पिछली बार की तुलना में ज्यादा सीटें मिली।  नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अद्भुत संगठनात्मक क्षमता से बीजेपी ने दोबारा केंद्र में सरकार बनायी और नरेंद्र मोदी पुनः प्रधानमंत्री बने। 

भारत के संसदीय इतिहास में 30 जुलाई, 2019 की तारीख एक अहम पड़ाव के रूप में दर्ज हुई। उच्च सदन में ऐतिहासिक तीन तलाक बिल पारित होने के बाद मुस्लिम महिलाओं के न्याय और सम्मान की दिशा में एक ऐसी सफलता हासिल हुई जिसकी प्रतीक्षा दशकों से थी। विपक्ष के तमाम गतिरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इसे पूरा करने की दिशा में प्रयास जारी रखे और अंतत: कामयाबी पाई। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभाव में आ गया है।

ट्रिपल तलाक़ न सिर्फ कुप्रथा थी बल्कि यह मानवीय हकों का उल्लंघन है, भारतीय कानून के हिसाब से स्त्री और पुरुष को दोनों को समान हक्क होते हैं| पर तीन तलाक के मामले में महिलाओं पर यह एक प्रकार से अन्याय होता है|

90 के दशक से ही पाकिस्तान को बात का भान था कि परंपरागत युद्ध के माध्यम से कश्मीर को प्राप्त नहीं कर सकता उसने भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध की शुरुआत की जिसका उद्देश्य भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में अलगाववाद को बढ़ाना, चरमपंथ तथा कट्टरपंथ का पोषण करना, सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ करा कर भारत की संवैधानिक संस्थाओं को क्षति पहुंचाना था। पाकिस्तान को अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जम्मू-कश्मीर के कुछ स्वार्थी  तत्व, हताश राजनीतिज्ञों तथा सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित वर्गों का सहयोग भी प्राप्त था इस प्रकार पाकिस्तान ने कश्मीर में एक संगठित चरमपंथी समूह की स्थापना की परिणामतः  जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं, अलगाववादी उद्घोष तथा सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी के आरंभ हो गई इन समस्याओं के निदान के लिए भारत की केंद्र सरकार तथा जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार कोई एकीकृत सफल कार्य योजनाओं को अंजाम न दे सकी फलतः स्थिति में निरंतर गिरावट आती रही वर्तमान केंद्र सरकार ने इन समस्याओं को स्थायी समाधान के लिए 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरसन को उचित समझा इसको दो राज्यों में विभाजित कर, लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया।

यह वर्ष उस ऐतिहासिक पल का भी साक्षी है जब सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय पीठ ने अयोध्या मामले में रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया जिसके अंतर्गत विवादित जमीन को रामलला विराजमान को देने और मुस्लिम पक्षकार (सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड) को अयोध्या में अलग से 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। 

 इस निर्णय के पीछे सैकड़ों वर्षों का एक दीर्घकालीन इतिहास है, दशकों चली न्याय प्रक्रिया का 9 नवंबर 2019 में समापन हुआ इस घटना से दुनिया ने यह भी जाना कि भारत का लोकतंत्र कितना जीवंत है और कितना मजबूत है, फैसला आने के बाद जिस प्रकार हर वर्ग ने हर समुदाय ने हर पथ के लोगों ने पूरे देश ने खुले दिल से इसे स्वीकार किया है वह भारत को पुरातन संस्कृति परंपराओं और सद्भाव को प्रतिबिम्बित करता है, भारत जिसके लिए जाना जाता है। 

भारत के तीनों पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई समुदायों के बहुत से लोग धार्मिक आधार पर उत्पीड़न झेलते हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का संविधान उन्हें विशिष्ट धार्मिक राज्य बनाता है, इनमें से बहुत से लोग रोजमर्रा के जीवन में सरकारी उत्पीड़न से डरते हैं।  इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों को अपनी धार्मिक पद्धति, उसके पालन और आस्था रखने में बाधा आती है. इनमें से बहुत से लोग भारत में शरण के लिए आए और वे अब यहीं रहना चाहते हैं. इन लोगों के वीजा या पासपोर्ट की अवधि भी समाप्त हो चुकी है. कुछ लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं है, लेकिन अगर वे भारत को अपना देश मानकर यहां रहना चाहते हैं तो सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है इन गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता का मार्ग प्रशस्त करने वाला महत्वपूर्ण नागरिकता (संशोधन) बिल 2019, 12 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून बन गया है।

नया वर्ष नई अपेक्षाओं के साथ नए संकल्पों को भी संभावनाएं प्रदान करता है, लोग नई शुरुआत का संकल्प लेते हैं कोई वजन, कोई नियमित व्यायाम, कोई  मितव्ययिता, तो कोई धूम्रपान छोड़ने संकल्प लेता है, आइये हम भी संकल्प ले वृक्षारोपण का, प्रदुषण कम करने का, स्वच्छता का और अपने छोटे परन्तु महत्वपूर्ण योगदान से नए भारत भारत का मार्ग प्रशस्त करें, नए वर्ष पर कामना है 

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः,सर्वे सन्तु निरामयाः ।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु,मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

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