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WORLD PHOTOGRAPHY DAY 2019 : चार दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का लखनऊ में आयोजन

Shweta Chauhan 19-08-2019 15:34:25



फोटो महंगे कैमरे से नहीं बल्कि दिमाग से खींची जाती है, क्योंकि ये जरूरी नहीं कि जिसके पास महंगा कैमरा हो वो अच्छी तस्वीर भी खींच सकता है। एक अच्छी तस्वीर क्लिक करने के लिए अच्छे विजन की जरूरत होती है। यह बातें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहीं। वह रविवार को द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन की पांचवीं सामूहिक राष्ट्रीय फोटो प्रदर्शनी में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। 

चार दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का आयोजन कलास्रोत आर्ट गैलरी में किया गया। प्रदर्शनी में कुल 91 भारतीय छायाकारों की तस्वीरें शामिल की गईं। वहीं चार विदेशी फोटोग्राफर्स ने भी अपनी एंट्री भेजी। अखिलेश यादव ने कहाकि फोटोजर्नलिस्ट एक तस्वीर के लिए कई मुसीबतों का सामना करते हैं। मुझे भी एक समय फोटोग्राफी का काफी शौक था, आज भी है लेकिन अब मैं उतना समय नहीं दे पाता हूं। संस्था के अध्यक्ष साहिल सिद्दीकी ने अखिलेश यादव का स्वागत किया। इस मौके पर चार वरिष्ठ छायाकारों का अखिलेश यादव ने सम्मान किया। इसमें विनय पांडे, विभु गुप्ता, मोहम्मद अशफाक, राजकुमार बाजपेई शामिल रहे।

आज होगी फोटोवॉक वल्र्ड फोटोग्राफी डे के मौके पर संस्था फोटोवॉक का आयोजन किया जाएगा। फोटोवॉक का आयोजन शाम चार बजे हजरतगंज मल्टीलेवल पार्किंग के पास किया जाएगा। वहीं 20 अगस्त को अलीगंज स्थित कलस्रोत आर्ट गैलरी में एक फोटोग्राफी वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ छायाकार अतुल हुंडू फोटोग्राफी की बारीकियां बताएंगे। देश-दुनिया में कमाया नाम वर्ल्‍ड फोटोग्राफी में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्र अंशुल मेहरोत्रा ने 2018 में ख्याति अर्जित की। उन्होंने लंदन में आयोजित वल्र्ड फोटोग्राफी प्रतियोगिता में लविवि ही नहीं देश का प्रतिनिधित्व किया था। लविवि पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. मुकुल श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अंशुल ने विद्यार्थी वर्ग में शीर्ष तीन में जगह बनाई। इसके लिए उन्हें 3500 यूएस डॉलर की ग्रांट प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। साथ ही अंशुल को चीन और साउथ अफ्रीका के साथ एक वर्ष के प्रोजेक्ट के लिए चयनित किया गया। वल्र्ड फोटोग्राफी ऑर्गनाइजेशन की ओर से यह प्रतियोगिता हर वर्ष आयोजित की जाती है। अंशुल ने बताया कि प्रोजेक्ट के दौरान खींची गई तस्वीरों की प्रदर्शनी लंदन में लगाई गई थी। इस प्रदर्शनी के जरिए दुनिया के लोग यहां की संस्कृति से वाकिफ हुए। बीकॉम के बाद एमबीए करने के साथ-साथ प्राइवेट जॉब कर रहे लक्ष्य ने फोटोग्राफी के शौक के लिए नौकरी छोड़ दी। यही शौक अब उनका कॅरियर बन गया है। लक्ष्य बताते हैं, नौकरी छोडऩे के बाद मिले पीएफ के पैसों से पहला कैमरा लिया। फिर उससे मैं जगह-जगह जाकर नृत्य और नाटकों की तस्वीरें लेने लगा। सोशल साइट्स पर अपनी खींची हुर्ईं तस्वीरें पोस्ट करता। धीरे-धीरे लोगों की सराहना मिलनी शुरू हुई और मेरा थोड़ा बहुत नाम होने लगा। डांस प्रोग्राम शूट करने के लिए मिलने लगे। फिर फैशन शूट और कुछ बड़े इवेंट में भी फोटोग्राफी के हुनर को दिखाने का मौका मिला। दो साल के अनुभव के बाद जनवरी 2019 में अपनी तस्वीरों की प्रदर्शनी शेड्स ऑफ पैशन लगाई, जिसे लोगों ने खूब सराहा। अच्छा लगता है जब छोटा सा प्रयास लोगों की सराहना पाकर बड़ा रूप ले लेता है। पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहा हूं करीब 20 सालों से फोटोग्राफी कर रहे मयंक सेहता अपने पिता राज सेहता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वह एक फोटोग्राफर का ग्रुप संचालित करते हैं, जो पिछले पांच वर्षों से फोटो एक्सपो आयोजित कर रहा है। इसमें युवा फोटोग्राफरों के लिए वर्कशॉप होती है। मयंक बताते हैं फोटोग्राफी में तकनीक का काफी दखल हुआ है। हमें तकनीक के साथ-साथ चलना होगा। पहले के समय में फोटोग्राफी सिर्फ एक वर्ग तक ही सीमित थी, लेकिन तकनीक ने इसे आमजन तक पहुंचा दिया। तकनीक ने हमारे हाथों में मोबाइल के माध्यम से एक कैमरा थमा दिया। वल्र्ड फोटोग्राफी डे के मौके पर संस्था फोटोवॉक का आयोजन किया जाएगा। फोटोवॉक का आयोजन शाम चार बजे हजरतगंज मल्टीलेवल पार्किंग के पास किया जाएगा। वहीं 20 अगस्त को अलीगंज स्थित कलस्रोत आर्ट गैलरी में एक फोटोग्राफी वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वरिष्ठ छायाकार अतुल हुंडू फोटोग्राफी की बारीकियां बताएंगे।


देश-दुनिया में कमाया नाम

वर्ल्‍ड फोटोग्राफी में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्र अंशुल मेहरोत्रा ने 2018 में ख्याति अर्जित की। उन्होंने लंदन में आयोजित वल्र्ड फोटोग्राफी प्रतियोगिता में लविवि ही नहीं देश का प्रतिनिधित्व किया था। लविवि पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. मुकुल श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अंशुल ने विद्यार्थी वर्ग में शीर्ष तीन में जगह बनाई। इसके लिए उन्हें 3500 यूएस डॉलर की ग्रांट प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। साथ ही अंशुल को चीन और साउथ अफ्रीका के साथ एक वर्ष के प्रोजेक्ट के लिए चयनित किया गया। वल्र्ड फोटोग्राफी ऑर्गनाइजेशन की ओर से यह प्रतियोगिता हर वर्ष आयोजित की जाती है। अंशुल ने बताया कि प्रोजेक्ट के दौरान खींची गई तस्वीरों की प्रदर्शनी लंदन में लगाई गई थी। इस प्रदर्शनी के जरिए दुनिया के लोग यहां की संस्कृति से वाकिफ हुए। 

बीकॉम के बाद एमबीए करने के साथ-साथ प्राइवेट जॉब कर रहे लक्ष्य ने फोटोग्राफी के शौक के लिए नौकरी छोड़ दी। यही शौक अब उनका कॅरियर बन गया है। लक्ष्य बताते हैं, नौकरी छोडऩे के बाद मिले पीएफ के पैसों से पहला कैमरा लिया। फिर उससे मैं जगह-जगह जाकर नृत्य और नाटकों की तस्वीरें लेने लगा। सोशल साइट्स पर अपनी खींची हुर्ईं तस्वीरें पोस्ट करता। धीरे-धीरे लोगों की सराहना मिलनी शुरू हुई और मेरा थोड़ा बहुत नाम होने लगा। डांस प्रोग्राम शूट करने के लिए मिलने लगे। फिर फैशन शूट और कुछ बड़े इवेंट में भी फोटोग्राफी के हुनर को दिखाने का मौका मिला। दो साल के अनुभव के बाद जनवरी 2019 में अपनी तस्वीरों की प्रदर्शनी शेड्स ऑफ पैशन लगाई, जिसे लोगों ने खूब सराहा। अच्छा लगता है जब छोटा सा प्रयास लोगों की सराहना पाकर बड़ा रूप ले लेता है।  


पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहा हूं

करीब 20 सालों से फोटोग्राफी कर रहे मयंक सेहता अपने पिता राज सेहता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वह एक फोटोग्राफर का ग्रुप संचालित करते हैं, जो पिछले पांच वर्षों से फोटो एक्सपो आयोजित कर रहा है। इसमें युवा फोटोग्राफरों के लिए वर्कशॉप होती है। मयंक बताते हैं फोटोग्राफी में तकनीक का काफी दखल हुआ है। हमें तकनीक के साथ-साथ चलना होगा।  पहले के समय में फोटोग्राफी सिर्फ एक वर्ग तक ही सीमित थी, लेकिन तकनीक ने इसे आमजन तक पहुंचा दिया। तकनीक ने हमारे हाथों में मोबाइल के माध्यम से एक कैमरा थमा दिया। 

आज हम सब फोटोग्राफर हैं। फोटोग्राफी मेरा शौक है, इस शौक के लिए मैंने एमबीए छोड़ दिया। आज पूरे प्रदेश में अपने काम के लिए सराहा जाता हूं, तो बहुत खुशी होती है। 

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