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अटल जी की पुण्यतिथि पर झारखंड के 17 जिलों में अटल क्लिनिक का हुआ उदघाटन

Shweta Chauhan 16-08-2019 17:35:14



भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के नाम लिए जाएं तो जेहन में सबसे पहले दोनों की कट्टर सियासी प्रतिद्वन्द्विता सामने आती है. दोनों पार्टियां बेशक एक दूसरे पर जमकर प्रहार करती रहें लेकिन चुनावी फायदे के लिए एक दूसरे की लोकलुभावन योजनाओं का लाभ उठाने से भी परहेज नहीं करतीं.


दिल्ली की राजनीतिक जमीन पर वर्चस्व के लिए दोनों पार्टियों की कोशिशें किसी से छुपी नहीं हैं. बीजेपी और आप के नेता एक दूसरे को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ते. लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार की ओर से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए शुरू की गई ‘मोहल्ला क्लीनिक’ योजना का महत्व बीजेपी भी समझती है.  


‘मोहल्ला क्लीनिक’ की तर्ज पर इस विचार को जम्मू और कश्मीर, तेलंगाना, कर्नाटक में अपनाए जाने के बाद अब झारखंड में भी बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने आज यानी 16 अगस्त से इसकी शुरुआत की है. फर्क ये है कि झारखंड में इस योजना को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर ‘अटल क्लीनिक’ रखा गया है. आज 16 अगस्त को ही वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि है.


'अटल क्लीनिक से होगी लोगों की मदद'


झारखंड सरकार ने राज्य के 17 जिलों  में 25 ‘अटल क्लीनिक’ शुरू किए हैं. योजना की शुरुआत पर खुशी का इजहार करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, ‘अटल जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए यही सबसे अच्छा तरीका हो सकता था.’


वार्ड कार्यालय में तीन कमरों में क्लीनिक का संचालन शुरू हो गया. यहां मरीजों को परामर्श, डायग्नोस्टिक टेस्ट और डिस्पेंसरी की सुविधाएं मिलेंगी. ऐसे ही एक सेंटर के डॉक्टर ने कहा, ‘लोगों को अब छोटी बीमारियों के लिए जिला अस्पताल या सदर अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. सेंटर में हमारे होते हुए कम से कम 26 रोगियों को परामर्श मिल चुका था. उम्मीद है कि वे सभी संतुष्ट हुए होंगे.’


स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव नितिन कुलकर्णी ने पहले जानकारी दी थी कि इन क्लिनिक में मिलने वाली सुविधाएं कमोवेश दिल्ली एनसीआर में संचालित ‘मोहल्ला क्लीनिक’ के समान हैं.


झारखंड में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को जोरशोर से शुरू किया है. लेकिन झारखंड की सच्चाई ये भी है कि यहां मरीजों पर डॉक्टर का अनुपात बहुत कम है. झारखंड में हर दस हजार लोगों पर एक ही डॉक्टर है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ‘विज़न 2020’ के मुताबिक हर एक हज़ार लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए.


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