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भारत आये अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की मुलाकात

Deepak Chauhan 26-06-2019 12:50:02


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अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ भारत दौरे पर हैं। बुधवार को उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया। इससे पहले पोम्पियों ने साउथ ब्लॉक में एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों आतंक और रक्षा सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। आपको बता दें कि 28 जून को ओसाका में जी -20 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बैठक होनी है और इस लिहाज से पोम्पिओ और डोभाल की मुलाकात पर सबकी निगाहें हैं।


अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के भारत दौरे की 11 बातें

1- पोम्पियो के साथ विदेश मंत्री जयशंकर की बुधवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में भारतीय आईटी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने के लिए एच1बी वीजा में दिक्कत और ईरान से कच्चा तेल खरीदने पर पाबंदी जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत में नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला उच्चस्तरीय संवाद होगा। जयशंकर पहली बार मंत्रिमंडल में आए हैं। मंत्री बनने के बाद उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री से यह पहली मुलाकात होगी। इस यात्रा में पोम्पियो और जयशंकर बुधवार को दोपहर के भोजन के समय बातचीत करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का भी कार्यक्रम है। 

2- पोम्पियो की इस यात्रा के ठीक बाद जापान के ओसाका में 28-29 जून को जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से अलग से मुलाकत होगी। पोम्पियो भारत और अमेरिका के उद्यमियों की एक गोलमेज बैठक को भी संबोधित करेंगे तथा इंडिया इंटरनेशल सेंटर में एक नीतिगत व्याख्यान भी देंगे।  

3- रूस से एस- 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंध से छूट की शर्तों को भारत ने पूरा करता है और इस मुद्दे पर ट्रम्प प्रशासन ने काफी लचीलापन दिखाया है। यह जानकारी मंगलवार को राजनयिक सूत्रों ने दी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली, मॉस्को के साथ अपने पुराने रक्षा संबंधों को खत्म नहीं कर सकता है। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ निजी एवं सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हुई है और वॉशिंगटन के लिए यह थोड़ी चिंता की बात है। एक सूत्र ने बताया कि रूस के साथ हमारे पुराने रक्षा संबंध हैं जिन्हें हम खत्म नहीं कर सकते हैं। भारत ने पिछले वर्ष अक्टूबर में 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए रूस से समझौता किया था। भारत ने अमेरिकी चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए इस समझौते को आगे बढ़ाया।

4- वार्ता के दौरान पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद बड़ा मुद्दा होगा। इस दौरान मुंबई, पठानकोट, उरी और पुलवामा हमले के बाद भी पाकिस्तान ने की ओर से कोई कदम नहीं उठाने की जानकारी देगा। फरवरी में ट्रंप ने कहा था कि पुलवामा हमले के बाद भारत काफी सख्त कदम उठाना चाहता है। वार्ता के जरिए पाक पर दबाव बनाने की रणनीति रहेगी। 

 5- अमेरिका के साथ भारी मात्रा में रक्षा उपकरणों और हेलीकॉप्टर की खरीद प्रस्तावित है। इस साल अमेरिका ने 2.6 अरब डॉलर की अनुमानित कीमत पर  24 एमएच 60 सी हॉक हेलीकॉप्टर बिक्री को मंजूरी दी थी। इसके अलावा मल्टी रोल फाइटर्स और 10 पी 8 आई लॉन्ग रेंज एयरक्राफ्ट की भी खरीद होनी है। पाइपलाइन में चल रहे इन सौदों को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ सकती है।

6- तालिबान से शुरू हुई बातचीत के बाद ट्रंप प्रशासन ने अफगानिस्तान से सैनिकों को बुलाने का ऐलान किया, जिससे भारत चिंतित है।  भारत ने इस मसले पर रुख साफ करते हुए अमेरिका को पहले ही संदेश दे दिया है कि युद्ध की विभीषिका झेल चुके अफगानिस्तान के राजनीतिक और संवैधानिक ढांचे को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है।  ऐसे में वहां पाकिस्तान के प्रभाव को रोकने की कोशिशों पर भी बात हो सकती है।

7- भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव से अमेरिका भी सशंकित है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका और भारत मिलकर रणनीतिक सहयोगी के तौर पर काम करने का निर्णय ले सकते हैं। 

8- भारत और अमेरिका के बीच व्यापार के मुद्दों पर हाल में टकराव देखने को मिला। अमेरिका ने अपने उत्पादों पर अधिक शुल्क थोपे जाने पर नाराजगी जताते हुए भारत को तरजीही राष्ट्र के दर्जे (जीएसपी) से बाहर कर दिया। जीएसपी का मसला सुलझने की उम्मीद है। 

9 एच-1बी वीजा की नई नीतियों के चलते भारतीय आईटी पेशेवर परेशान हैं। वीजा के अभाव में आईटी कंपनियों में भारतीयों के लिए नौकरी करना मुश्किल हो गया है। भारत की चिंताओं के बीच हाल में अमेरिका कह चुका है कि वह वीजा की बंदिशों की समीक्षा करेगा। हालांकि अमेरिका यह भी कह चुका है कि उसने भारत को निशाना बनाने के लिए ऐसा कदम नहीं उठाया।  

10- भारत की ओर से रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने की कोशिश चल रही है। इस पर भी अमेरिका के साथ टकराव है। अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने एस-400 प्रणाली न खरीदने का अनुरोध करते हुए चेतावनी भी दी है। अमेरिका इसके स्थान पर विकल्प भी सुझाए हैं। 

11- ईरान से तनातनी के चलते अमेरिका ने हाल में कई प्रतिबंध थोपे हैं। अमेरिका ने ईरान से तेल न खरीदने का भी भारत पर दबाव डाला है।  भारत को सबसे ज्यादा तेल निर्यात करने वाला ईरान तीसरा देश है। ईरान इस दौरान तेल खरीदने से छूट देने की बात भी कर सकता है। क्योंकि ईरान से भारत अपनी जरूरतों का दस प्रतिशत से ज्यादा तेल खरीदता है। भारत शांतिपूर्ण तरीके से अमेरिका-ईरान के मसले का हल होने के पक्ष में हैं।

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