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श्रमिक ट्रेन में महिला की मौत पर खाना पीना ना मिलने का आरोप

एक महिला रेलवे स्टेशन पर बेसुध जमीन पर पड़ी हैं. उनके ऊपर एक चादर पड़ी है और उनका छोटा-सा बच्चा चादर खींचते हुए मां को उठाने की कोशिश करता हुआ नजर आता है.

Deepak Chauhan 29-05-2020 19:46:43



लॉकडाउन के दौरान श्रमिक ट्रेनों में मुसाफिरों को खाना और पानी न मिलने की ख़बरें लगातार सामने आ रही हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक महिला रेलवे स्टेशन पर बेसुध जमीन पर पड़ी हैं. उनके ऊपर एक चादर पड़ी है और उनका छोटा-सा बच्चा चादर खींचते हुए मां को उठाने की कोशिश करता हुआ नजर आता है.

एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो लिए जाने तक इस महिला की मौत हो चुकी थी. उनका नाम अरवीना खातून (35) था और वह कटिहार की रहने वाली थीं. वे अपने बहन-बहनोई के साथ श्रमिक एक्सप्रेस से अहमदाबाद से बिहार आ रही थीं.

बीते रविवार वह ट्रेन में सवार हुई थीं. परिजनों के अनुसार खाना और पानी न मिलने के चलते ट्रेन में महिला की स्थिति खराब हो गई. सोमवार दोपहर करीब 12 बजे ट्रेन में उन्होंने दम तोड़ दिया.

ट्रेन के मुजफ्फरपुर जंक्शन पर दोपहर लगभग तीन बजे पहुंचने पर तब रेलवे पुलिस ने महिला का शव ट्रेन से उतारा. महिला के शव को जब प्लेटफॉर्म पर रखा गया तब उनका ढाई साल का बच्चा शव से चादर खींचते हुए उन्हें जगाने की कोशिश करने लगा.

हालांकि रेलवे ने भूख से मौत होने की बात से इनकार किया है. जीआरपी के डिप्टी एसपी रमाकांत उपाध्याय ने कहा, ‘यह घटना 25 मई की है. महिला अहमदाबाद से आ रही थी. महिला की मधुबनी में मौत हो गई. उसकी बहन ने बताया कि अचानक ही महिला की मौत हो गई.’

उन्होंने आगे कहा कि खाने और पानी की कोई समस्या नहीं थी. महिला को पिछले एक साल से कोई बीमारी थी. वह दिमागी तौर से अस्थिर भी थी. मौत के कारणों के बारे में डॉक्टर ही बता सकते हैं.


मुज़फ़्फ़रपुर स्टेशन पर ढाई साल के बच्चे की मौत

भीषण गर्मी और खाना नहीं मिलने से बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्टेशन पर ही ढाई साल के एक बच्चे की मौत का मामला भी सामने आया है.

एक न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक बच्चे के परिजनों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण और ट्रेन में खाना-पानी नही मिलने के कारण बच्चे की हालत काफी बिगड़ गई और उसने स्टेशन पर ही दम तोड़ दिया.

मृतक बच्चे के पिता मकसूद आलम ने बताया, ‘मैं दिल्ली में पेंटर का काम करता था. रविवार को अपने परिवार के साथ श्रमिक स्पेशल ट्रेन से घर के लिए चला. सोमवार सुबह दस बजे ट्रेन मुज़फ़्फ़रपुर पहुंची. भीषण गर्मी के बीच ट्रेन में खाना-पानी नही मिलने के कारण बच्चे की तबियत खराब हो गई थी और मुज़फ़्फ़रपुर स्टेशन पर उतरते ही उसकी हालत और बिगड़ गई.’

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मकसूद आलम का आरोप है कि उन्होंने मदद के लिए पुलिस और स्टेशन पर मौजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर बच्चे के इलाज की गुहार लगाई लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी.

उनका कहना है कि वह स्टेशन पर चार घंटे तक मदद के लिए भटकते रहे लेकिन घर जाने के लिए गाड़ी के साधन की भी किसी ने जानकारी नहीं दी और आखिरकार उनके बच्चे ने स्टेशन पर ही दम तोड़ दिया.

बता दें कि कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन के दौरान श्रमिक लगातार त्रासदियों का शिकार हो रहे हैं. बीते दिनों केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए एक मई से श्रमिक विशेष ट्रेनों की शुरुआत की थी.

लेकिन परेशानियों का सामना करने बाद श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सवार होने वाले प्रवासी श्रमिकों को न सिर्फ खाने-पीने के सामानों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है बल्कि रेलवे द्वारा रूट बदलने के कारण ट्रेनें कई दिनों की देरी से अपने गंतव्य तक पहुंच रही हैं.

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