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मोदी को पंसद आई देनिल मेदवेदेव की सादगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में देश के युवाओं को सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित किया है। मोदी ने इस सोच के लिए रूस के टेनिस स्टार देनिल मेदवेदेव के खेल और जज्बे का उदाहरण दिया।

sakshi sharma 29-09-2019 14:31:06



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में युवाओं की सकारात्मक सोच पर भी बात की है। हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम में मोदी देश की जनता से रेडियो के माध्यम से मुखातिब होते हैं। 29 सितंबर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने युवाओं में सकारात्मक सोच की महत्ता पर जोर दिया है। उन्होंने इसके लिए यूएस ओपन 2019 में उपविजेता रहे टेनिस स्टार देनिल मेदवेदेव का उदाहरण दिया। उन्होंने 23 वर्षीय रूसी खिलाड़ी के स्पोर्ट्समैन स्पिरिट की चर्चा की। उन्होंने कहा कि यूएस ओपन में जीत के जितने चर्चे थे उतने ही उपविजेता रहे मेदवेदेव की स्पीच के भी चर्चे थे।

खेल भावना का जीता-जागता सबूत है मेदवेदेव: पीएम मोदी
मोदी ने कहा कि मेदवेदेव की सादगी और परिपक्वता हर किसी को प्रभावित करने वाली थी। मोदी ने कहा कि वह इस युवा खिलाड़ी के भाषण से खूब प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, 'मेदवेदेव अभी थोड़ी देर पहले ही फाइनल मुकाबला हारे थे। कोई और होता तो वह उदास होता लेकिन मेदवेदेव ने अपनी बातों से सभी के चेहरों पर मुस्कान ला दी।' उन्होंने कहा कि मेदवेदेव ने हार के बाद भी नडाल की तारीफ की जो खेल भावना का जीता-जागता सबूत हैं।
मैच में हारने वाले का जोश और जीतने वाली की विनम्रता देखने लायक थी'
पीएम ने बताया कि नडाल ने भी मेदवेदेव के खेल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि एक ही मैच में हारने वाले का जोश और जीतने वाली की विनम्रता दोनों ही देखने लायक थीं। इसमें हर वर्ग और हर उम्र के सीखने के लिए काफी कुछ है। ये क्षण हार-जीत से परे होते हैं। हार-जीत मायने नहीं रखती। जिंदगी जीत जाती है।

प्रधानमंत्री ने इस श्लोक का भी जिक्र किया:-
विद्याविनयोपेता हरति न चेतांसि कस्य मनुजस्य।
मणिकाञ्चनसंयोगो जनयति लोकस्य लोचनानन्दम्॥

इसका अर्थ है- जब किसी व्यक्ति में योग्यता और विनम्रता एक साथ समाहित हो जाए तो वह फिर किसका दिल नहीं जीत सकता! प्रधानमंत्री ने कहा कि इस युवा खिलाड़ी ने अपने खेल और इसके बाद अपने शब्दों से दुनिया भर के लोगों का दिल जीत लिया।

क्या कहा था मेदवेदेव ने
सबसे पहले मैं राफेल नडाल को मुबारकबाद देना चाहूंगा। उन्होंने 19 ग्रैंड स्लैम जीते हैं। यह शानदार काम है। मैं उन्हें और उनकी टीम को मुबारकबाद देना चाहूंगा। आपके खिलाफ खेलना काफी मुश्किल है। मेदवेदेव ने कहा, 'जब मैं बड़ी स्क्रीन की ओर देख रहा था तो वह स्क्रीन पर नडाल के जीते सभी ग्रैडस्लैम दिखा रहे थे। मैं सोच रहा था कि अगर मैं जीत गया तो वह स्क्रीन पर क्या दिखाएंगे।' इस 23 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने कहा, 'आपने जो टेनिस के लिए जो किया है वह लाजवाब है। आपने लाखों बच्चों को टेनिस खेलने के लिए प्रेरित किया।'

नडाल को मिली थी कड़ी टक्कर
पांच सेट चले इस मैच में इस रूसी खिलाड़ी ने दुनिया के नंबर 2 खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी थी। नडाल पहले दो सेट जीतकर आसानी से जीत रहे थे और फिर मेदवेदेव ने अगले दो सेट जीतकर मैच को रोमांच ला दिया। फाइनल सेट में भी नडाल को कड़ी चुनौती मिली और आखिरी में उन्होंने जीत हासिल कर मैच अपने नाम किया।

'संघर्ष खत्म होने से पहले क्यों न एक प्रयास किया जाए'
इस बारे में जब उनसे पूछा गया कि आखिर तीसरे सेट में उनके दिमाग में क्या चल रहा था तो मेदवेदेव ने कहा कि उन्होंने सोचा कि अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचना बड़ी बात है। कुछ ही देर में मुकाबला खत्म हो जाएगा तो चलो क्यों न इससे पहले एक प्रयास किया जाए। और यह मुकाबला कड़ा होता चला गया। उन्होंने हौसला बढ़ाने के लिए दर्शकों का भी अभिवादन किया। उन्होंने कहा दर्शकों ने उनका हौसला बढ़ाया और तभी वह इतना संघर्ष दे पाए।

कैसा रहा था मैच
स्पेनिश स्टार राफेल नडाल ने रूस के मेदवेदेव को कड़े फाइनल मुकाबले में हराकर यूएस ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया था। करीब 5 घंटे तक चले मुकाबले में नडाल ने मेदवेदेव को 7-5, 6-3, 5-7, 4-6, 6-4 से शिकस्त देकर अपने करियर का 19वां ग्रैंड स्लैम खिताब अपनी झोली में डाला। दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी नडाल को मेदवेदेव के खिलाफ जीतने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा।



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