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आवाज़ नहीं जीती जागती मिस्साल है साहिल

HIV पीड़ितों के लिए एक जीती जगती मिसाल है साहिल यादव जिन्होंने न सिर्फ इस पर खुद विजय प्राप्त की बल्कि अब लोगो को प्रेरित कर उनका हौसला बढ़ा रहे है

Gunjan 16-10-2019 19:17:33



आवाज़ नहीं जीती जागती मिस्साल है साहिल  


मंज़िले यूँ ही नहीं मिलती समाज को बदलना पड़ता है, आज भी है ऐसे कई खौफनाक हादसे जिनसे उबर आगे बढ़ना पड़ता है


HIV पीड़ितों के लिए एक जीती जगती मिसाल है साहिल यादव जिन्होंने न सिर्फ इस पर खुद विजय प्राप्त की बल्कि अब लोगो को प्रेरित कर उनका हौसला बढ़ा रहे है 


साहिल यादव ऐसी हस्ती जो की HIV/AIDS  से ग्रसित लोगो की सेवा के लिए एक ऐसी संस्था ओम प्रकाश नेटवर्क (OPNP+) के संस्थापक है जहाँ पर पीड़ितों की सहायता की जाती है और उन्हे जीवन जीने का एक अलग नजरिया प्रदान किया जाता है। 

साहिल यादव जिनके साथ एक ऐसा हादसा हुआ की उनके शरीर में ख़ून की कमी हो गयी और जब उन्हे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया तो वहां पर HIV संक्रमित ख़ून उन्हे चढ़ा दिया गया और जब उनकी जांच की गयी तो HIV सकारात्मक निकला। इसके बाद जहाँ हम डॉक्टर को भगवान् मानते है उन्होंने ही साहिल यादव के लिए ऐसे शब्द कहे की उनकी ज़िन्दगी में मानो ज़लज़ला आ गया हो। गाँव-समाज के सामने उन्हे एक अछूत बिमारी का रोगी बताया गया जो की छूने से भी फैलती है। घर-परिवार-समाज उन्हे अछूत मानने लगा और उनका हर जगह से तिरस्कार किया जाने लगा। उनके खुद के परिवार ने उनका बिस्तर घर के बाहर कर दिया , खाना जिस तरह से हम किसी जानवर को भी नहीं देते है उस प्रकार से दिया जाने लगा, पास बैठ कर ही नहीं दूर से भी कोई बात करना तक पसंद नहीं करता था। यहाँ तक की गाँव समाज ने उन्हे उस जगह से भी निष्काषित कर दिया , और साहिल यादव बिना सोचे समझे दिल्ली की ट्रैन पकड़ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आ पहुंचे और अपना पेट पालने के लिए उन्होंने उसी जगह कूड़ा बीन कर गुज़ारा करने का फैसला लिया 11 साल की उम्र ऐसा हादसा जिसने साहिल यादव की ज़िन्दगी बदल दी। इस सफर में भी एक नयी कहानी की शुरुआत तब हुई जब उन्हे रोज़ कूड़ा बीनने का काम कर आते जाते ओम प्रकाश यादव ने देखा और पूछा की तुम यह काम किस मजबूरी में कर रहे हो। ..यह सवाल कई बार पूछने बाद साहिल यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ी और बताया की वजह क्या है। यह सब सुनने के बाद ओम प्रकाश यादव जी ने साहिल यादव को अपने पास रखा,अपना नाम दिया उन्हे पढ़ाया-लिखाया और एकअच्छा इंसान बनाया। साहिल यादव के जीवन का तख्तापलट कर अपनी तरह ही समाज से जुड़ने लायक बनाया। HIV से संक्रमित लोगो की सेवा करने की नयी उम्मीद और प्रेरणा तब से ही ठान ली थी  साहिल यादव ने जब से वो अपना गाँव-समाज छोड़ कर दिल्ली जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में कदम रखा। 

   2004 में अमेरिका देश के राष्ट्रपति विलियम जेफरसन "बिल" क्लिंटन भारत देश से साहिल यादव को गोद लिया और उन्हे अमेरिका ले गए उनका पूर्ण रूप से इलाज किया गया जो की सफल रहा। वहां से अपने देश लौट साहिल यादव एक प्रेरणा बने भारत सरकार के लिए HIV / AIDS के ब्रांड एंबेसडर बने। लाखों लोगो की नज़र में एक ऐसी लाइलाज बिमारी को दूर करने का जरिया बने जो की एक ग़लतफहमी का शिकार थे। अपने गाँव-समाज के लिए हीरो बने जिन्होंने उन्हे उसी जगह से बाहर निकल दिया था और जब वह अपने गाँव पहुंचे तो 2000 लोगो ने उनका स्वागत किया सम्मानित किया। अपने गाँव-समाज के लिए ही नहीं पूरे देश के साहिल यादव आज एक ऐसी मिसाल है जिन्होंने ज़िन्दगी का रूख ही नहीं नज़रिया भी बदल दिया है। लाखों लोग आज उन्हे देख कर जीवन सुकून से जी रहे है।

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