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मां ने छह माह के भ्रूण को डस्टबिन में फेंका, कुत्ते ने नोच-नोच कर खाया

मां ने छह माह के भ्रूण को डस्टबिन में फेंका, कुत्ते ने नोच-नोच कर खाया

मां ने छह माह के भ्रूण को गर्भ में पालने के बाद डस्टबिन में फेंका, कुत्ते ने नोच-नोच कर खाया

किसी बिन ब्याही मां ने लोक-लाज के डर से या मादा भ्रूण होने के चलते किसी मां ने उठाया ऐसा कदम

बेतिया. शहर के मित्रा चौक के पास बुधवार को मानवता को शर्मसार करता एक दृश्य दिखा जो दिल को दहलाने और मन को विचलित करने वाला तो था ही साथ ही समाज के मुंह पर करारा तमाचा भी था। बीती रात किसी बिन ब्याही मां या फिर बेटी होने के भय से किसी मां ने गर्भ में पहले छह माह के भ्रूण की हत्या करवा कर डस्टबिन में फिंकवा दिया था। सुबह में एक कुत्ता उसे डस्टबिन से निकाल कर नोच-नोच कर खा रहा था।

किसी शख्स की संवेदना जगी तो उसने इसकी जानकारी पुलिस-प्रशासन को दी तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। चिकित्सकों के मुताबिक 12 सप्ताह के बाद मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण का हाथ, पैर, सिर व मुंह आदि दिखने लगता है। फेंके गए भ्रूण के भी सभी अंग दिख रहे थे। शहर की महिला चिकित्सक डाॅ. सपना सरखेल ने भी तस्वीर देखने के बाद बताया कि यह भ्रूण करीब छह माह से गर्भ में पल रहा था।

बेटी बचाओ अभियान की उड़ रहीं धज्जियां:स्थानीय लोगों ने बताया कि कूड़ेदान में फेंके गए शिशुओं में ज्यादातर बच्चियां ही देखी जाती हैं। इससे जाहिर होता है कि भ्रूण हत्या करने वाले निजी चिकित्सक बेटी बचाओ अभियान की किस तरह धज्जियां उड़ा रहे हैं।

ऐसे शिशुओं के लिए है पालना योजना:राज्य में अवैध तरीके से जन्मे शिशुओं के लिए पालना योजना चलाई जा रही है। नरकटियागंज अनुमंडल अस्पताल में भी पालनाघर है। इसमें अनाथ व अवैध बच्चों को गोद न लेने की स्थिति में उनकी परवरिश की जाती है।

संवेदनहीनता की तस्वीर:लोगों ने बताया-अवैध संबंध से जन्मे या कन्या के भ्रूण को लोग मित्रा चाैक के पास फेंक कर चले जाते हैं। शहर के कई जगहों पर ऐसा कुकृत्य माह-दो माह पर देखने को मिल जाता है। हर बार इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर वार्ड सदस्य द्वारा प्रशासन को दी जाती रही है लेकिन प्रशासन ने कभी भी ठोस कदम नहीं उठाया।


Khushboo

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