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अफसरों की मिलीभगत से 300 करोड़ के चावल घोटाला कर गए राइस मिलर्स, 8 साल में 80 एफआईआर दर्ज

अफसरों की मिलीभगत से 300 करोड़ के चावल घोटाला कर गए राइस मिलर्स, 8 साल में 80 एफआईआर दर्ज

ग्राउंड रिपोर्ट: अफसरों की मिलीभगत से 300 करोड़ के चावल घोटाला कर गए राइस मिलर्स, 8 साल में 80 एफआईआर दर्ज

जिन अफसरों को हर 15 वें दिन निगरानी रिपोर्ट देनी थी, 4 साल तक मामला दबाए बैठे रहे।

करनाल/चंडीगढ़.प्रदेश में सरकार और मिलर्स के बीच आठ साल से चावल का खेल चल रहा है। 300 करोड़ की राशि मिलर्स में अटकी हुई है। 80 मिलर्स पर मामला दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। अब सरकार इस मामले में कार्रवाई का मन बना रही है। खाद्य आपूर्ति विभाग का आंकड़ा बताता है कि अकेले करनाल जिले के मिलर ही 117 करोड़ रुपए के चावल का घोटाला कर गए। पूरे प्रदेश में ब्याज समेत यह रकम 300 करोड़ रुपये की बनती है।

हर 15 दिन बाद करना होता है फिजिकल वेरिफिकेशन

नियमानुसार खाद्य आपूर्ति विभाग व खरीद एजेंसियों के अफसरों को हर 15 दिन बाद फिजिकल वेरिफिकेशन करना होता है। निगरानी सिस्टम के बावजूद मिलर्स के स्टॉक से चावल ओपन मार्केट में बिक गया। कार्रवाई के नाम पर डिफाल्टर्स पर 8 साल में प्रदेश में 80 एफआईआर हुईं। सबसे ज्यादा 25 मामले सीएम सिटी करनाल के हैं। अधिकारी कहते हैं कि डिफॉल्टर मिलर्स की जमीन नीलाम करने के लिए कागजात तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन इसमें भी कानूनी अड़चन है। ज्यादातर मामलों में जिस फर्म के नाम पर एफआईआर हुई। उसके संचालक ने बड़ी चालाकी से फर्म का नाम ही बदल दिया। दूसरी जिस जमीन पर मिल लगी है, उस पर पहले से ही बैंक लिमिट यानी लोन है। ऐसे में इस जमीन पर खरीद एजेंसी के अलावा बैंक भी दावेदार है।

यह होना था : मिलिंग कर एजेंसियों को 31 मार्च तक चावल लौटाना था

मिलर्स को अक्टूबर में धान अलॉट होता है। मिलिंग का 10 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है। सुखाई और ढुलाई का प्रति क्विंटल एक रुपया और बारदाने का 7.32 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान होता है। उन्हें 100 किलोग्राम धान के बदले 67 किलो चावल लौटाना होता है। मिलिंग कर खरीद एजेंसियों को 31 मार्च तक चावल लौटाना होता है। डीएफएससी, हैफेड व हरियाणा एग्रो को धान खरीद की जिम्मेदारी होती है।

हुआ यह : 2014 से 2017 तक के सभी केस इस साल मई में दर्ज हुए

नियम है कि खाद्य आपूर्ति विभाग व खरीद एजेंसियों के अफसर हर 15 दिन बाद फिजीकल वेरिफिकेशन करें। किसी मिल में धान स्टॉक कम मिलने पर नोटिस जारी करके स्टॉक दूसरे मिल को सौंपने का प्रावधान है, लेकिन यहां सालों तक मामले दबाए गए। वर्ष 2013-14 के बकाया चावल के लिए 10 एफआईआर इस साल 23 व 24 फरवरी को हुईं। इसके अलावा 2014 से 2017 तक के सभी इस साल मई तक दर्ज हुए हैं। सभी मामलों में आईपीसी की धारा 406, 420, 120बी लगी हैं।

लटकाए मामले: अफसरों की सफाई मिलर्स डलवाते राजनीितक दबाव

खाद्य आपूर्ति विभाग के अफसर मामले को लटकाते रहे और सफाई देते हैं कि राइस मिल की चेकिंग करते हैं तो मिलर्स राजनीतिक दबाव डलवाते हैं। एफआईआर करवाने में ज्यादा टाइम लगता है। करनाल में 25 राइस मिलरों पर एफआईआर हुई हैं, लेकिन एक मामले में ही गिरफ्तारी हुई। शेष मामलों में पुलिस कार्रवाई से पहले ही सूचना लीक होने से आरोपी मिलर्स को अग्रिम जमानत लेने का मौका मिल गया।

ऐसे समझिए... कैसे नाम बदल सरकार को लगा रहे चूना

-वर्ष 2013-14 में करनाल की आशीर्वाद फूड्स को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 52,769 क्विंटल धान अलॉट की, लेकिन 21,881 क्विंटल चावल पेंडिंग रह गया तो बाद में एफआईआर हुई। अब यहां अन्नपूर्णा फूड्स के नाम से राइस मिल चल रही है। जिस सदस्य के नाम एफआईआर हुई, अब उससे अलग व्यक्ति कारोबार को संभाल रहे हैं।

-मां वैष्णो फूड जुंडला के डिफॉल्टर होने पर इस जगह पर शर्मा फूड जुंडला के नाम से राइस मिल शुरू हुई। फिर शर्मा फूड्स को 40,956 क्विंटल धान अलॉट की गई। इसमें से वर्ष 2015-16 का 9,920 क्विंटल चावल पेंडिंग पड़ा है। अब शर्मा एग्रो फूड्स पर केस दर्ज हुआ है।

15 अधिकारियों पर विभाग करेगा कार्रवाई

विभाग की ओर से ऐसे 15 अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी, जो इस मामले में दोषी हैं। इसके लिए एसआईटी का गठन पहले ही कर दिया गया है। बड़े स्तर पर कई बैठकें भी हो चुकी हैं। इनमें अधिकारियों पर चार्जशीट हो सकती है और उनकी पदोन्नति भी रुक सकती है। इस संदर्भ में सरकार जल्द ही फैसला करने जा रही है।

घपला न हो, इसलिए टीम बनाकर होगी कार्रवाई

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एसीएस रामनिवास गुप्ता का कहना है कि अब किसी भी चावल मिल मालिक को सरकारी धान देने से पहले फिजीकल वेरीफिकेशन कराई जाएगी। पता लगाया जाएगा कि जिस फर्म को धान कुटाई के लिए दिया जाना है, वह सही है या नहीं। उसका पिछला रिकॉर्ड कैसा है। इस संदर्भ में एक टीम का गठन किया जाएगा। टीम की रिपोर्ट के बाद ही यह धान फर्म को उपलब्ध होगा, ताकि किसी तरह का गोलमाल न होने पाए। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से जो टीम गठित होगी। उसमें फूड एवं सप्लाई विभाग के डीएम, डीसी, मार्केट कमेटी के अधिकारी व अन्य अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।

कितना चावल बकाया

वर्ष चावल बकाया एफआईआर

2013-14 3.24 लाख क्विंटल 13

2014-15 67.5 हजार क्विंटल 6

2015-16 89.2 हजार क्विंटल 4

2016-17 7,342 क्विंटल 1

2017-18 30,635 क्विंटल 2

(यह आंकड़े खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के हैं। करनाल में कुल 4.63 लाख क्विंटल चावल पेंडिंग है। मार्केट रेट के अनुसार औसतन रेट 2,540 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 117.79 करोड़ की रिकवरी बनती है।)


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