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स्कूल वैन रेप: बच्ची से पखवाड़े भर तक कि घिनौनी हरकत

स्कूल वैन रेप: बच्ची से पखवाड़े भर तक कि घिनौनी हरकत

हल्द्वानी- मासूम बच्ची के साथ करीब एक पखवाड़े से स्कूल वैन के चालक और परिचालक घिनौनी हरकत कर रहे थे। मामला सामने आने के बाद कई और बड़े खुलासे हुए हैं। जब माता पिता मासूम को डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तो उसने जो बताया वह सुन बच्ची के माता-पिता फूट-फूट कर रोने लगे। बच्ची से ये सारी बात सीसीटीवी के सामने हुई। बच्ची ने बताया कि दोनों आरोपियों द्वारा उसके साथ कई बार वैन में गंदी हरकत की गई। डॉक्टर ने माता-पिता को बच्ची का एसटीएच में इलाज कराने की सलाह दी थी। बच्ची की मां ने डॉक्टर को बताया कि घर में बताने पर उसकी सास ने मुंह बंद करने की नसीहत दी थी। गरीब मां-बाप को न जाने किसने क्या घुट्टी पिलाई बताया जा रहा है कि गौलापार इलाके में रहने वाली मासूम के साथ स्कूल वैन चालक-परिचालक यह घिनौनी हरकत करीब पखवाड़े भर से कर रहे थे। दर्द उठने पर मां जब बच्ची को डॉक्टर के पास ले गई तब मामला सामाजिक कार्यकर्ताओं से होकर पुलिस तक पहुंचा। स्कूल प्रबंधन इतना गंभीर मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की बजाय इसे मैनेज करने में लगा रहा। गरीब मां-बाप को न जाने किसने क्या घुट्टी पिलाई कि वह सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के समझाने पर भी रिपोर्ट दर्ज करने को तैयार नहीं हो रहे थे। बहुत समझाने पर भी माता-पिता केवल मारपीट की तहरीर देने की बात कह रहे थे। दुष्कर्म की शिकार बच्ची चार दिन से स्कूल नहीं गई है। देर रात इस मामले में एक सामाजिक कार्यकर्ता की तहरीर पर पुलिस ने धारा 354 और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर कराया। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट आने पर धाराएं बढ़ाई जाएंगी। दुष्कर्म की घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की कलई खोल दी पब्लिक स्कूल की वैन में मासूम छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की कलई खोल दी है। सीबीएसई के साथ ही राज्य सरकार की स्पष्ट गाइड लाइन के बावजूद स्कूल वैन में महिला गार्ड की तैनाती नहीं की गई। यही हाल कमोवेश अधिकांश पब्लिक स्कूलों का है। बच्चों को स्कूल बस और वैन के चालक-परिचालकों के सहारे छोड़ दिया जाता है। सीबीएसई ने पिछले वर्ष स्कूली बच्चों के साथ हुई घटनाओं के बाद 23 फरवरी 2017 को सीबीएसई से संबद्ध सभी पब्लिक स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर गाइड लाइन जारी की थी। स्कूल बस हो या फिर वैन, चालक और परिचालक के साथ एक महिला गार्ड भी होनी चाहिए या फिर महिला अध्यापक की व्यवस्था होनी चाहिए। सीबीएसई ने यह भी निर्देश दिए थे कि स्कूल बस में बच्चों के सवार होने के दौरान चालक के मोबाइल पर प्रतिबंध रहेगा। चालक के शराब पीकर बस चलाने के संशय पर तत्काल रूप से मेडिकल कराया जाएगा। हाल यह है कि शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सीबीएसई मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में गिनती के स्कूलों को छोड़कर बच्चों की सुरक्षा के मानकों का पालन ही नहीं किया गया है। हल्द्वानी में पब्लिक स्कूल की वैन में मासूम छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना ने अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। अभिभावकों को डर सताने लगा है कि अब उनके बच्चे क्या स्कूलों में भी सुरक्षित नहीं हैं। घर के बाद यदि बच्चों के लिए कोई सुरक्षित स्थान समझते हैं तो वह है उसका स्कूल। लेकिन बच्चों के लिए सुरक्षा की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी पब्लिक स्कूल संचालक शायद पैसा कमाने की अंधी होड़ में भूल चुके हैं। कुछ लोगों ने तो पब्लिक स्कूलों को केवल नोट छापने की टकसाल बना रखा है, जहां न तो शिक्षा का स्तर है और न ही सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं। केवल है तो तीन से पांच मंजिला भवन और भारी भरकम फस लेने के काउंटर। पिछले साल एक पब्लिक स्कूल में इस तरह की घटना का आरोप लगाकर बवाल होने पर प्रशासन और शिक्षा विभाग नींद से अवश्य जागा था लेकिन समय बीतने के साथ ही बच्चों की सुरक्षा के मानकों की जांच पड़ताल करने वाला जिला प्रशासन और पुलिस एवं परिवहन विभाग बेपरवाह हो गया। जब कोई घटना होती है तो प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों की चेकिंग करने का ढोंग करने के साथ ही केवल नोटिस भेज कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। मासूम बच्चों की सुरक्षा की जांच कौन परखेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। प्रतिमाह बच्चों से लाखों रुपये फीस वसूलने के बावजूद कई स्कूल प्रबंधन बच्चों को सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय और एक स्वस्थ वातावरण उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। शासन - प्रशासन को स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी आखिर स्कूल में आने वाली इतनी फीस का इस्तेमाल प्रबंधन कहां कर रहे हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इतना ही नहीं ड्रेस और किताबों के नाम पर मोटा कमीशन ऐंठा जा रहा है सो अलग। कहीं न कहीं शासन - प्रशासन को स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी। आल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन पीड़ित परिवार के हर प्रकार के साथ है। यदि परिवार को आवश्यकता पड़ेगी तो कानूनी लड़ाई की जिम्मेदारी संस्था लेगी। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन पर भी केस दर्ज होना चाहिए। हल्द्वानी में हुई इस घटना से फिर शिक्षा का मंदिर शर्मसार हुआ है। अगर अपराधियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होती है तो अभिभावक संघर्ष समिति आंदोलन के लिए बाध्य होगी और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी मामले को दबाने पर कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे घटना की कोई जानकारी नहीं है। मैं शहर से बाहर हूं। हां इतना जरूर है कि सभी पब्लिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के मानक पूरे हैं। इस बारे में स्कूलों को पीएसए समय-समय पर गाइड लाइन भेजता रहा है। स्कूल वैन में मासूम बच्ची के साथ इस तरह की घटना होना काफी दुखद है। इस घटना में जो भी दोषी है, पुलिस को उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। पीएसए पीड़ित परिवार के साथ है।


Madhu Dheer

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