लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्थायी लोक अदालतों में कोरम की कमी को गंभीर मुद्दा मानते हुए राज्य सरकार को कड़ी टिप्पणी के साथ निर्देश जारी किए हैं। वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह ने कहा कि आम नागरिकों को त्वरित, सुलभ और कम खर्चीले न्याय उपलब्ध कराने के लिए गठित लोक अदालतों का निष्क्रिय होना बेहद पीड़ादायक है।
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा सात स्थायी लोक अदालतों के 9 सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार को गलत ठहराते हुए प्रमुख विधि सचिव को तत्काल प्रभाव से इनका सेवा विस्तार करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला हाईकोर्ट में स्वप्रेरित जनहित याचिका के रूप में सामने आया, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि अजमेर, अलवर, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, जयपुर महानगर द्वितीय और जालोर की स्थायी लोक अदालतों के सदस्यों का कार्यकाल फरवरी में समाप्त हो गया था और उनके एक वर्ष के विस्तार की मांग की गई थी।
हालांकि, राज्य सरकार के प्रमुख विधि सचिव ने 9 फरवरी को इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस पर याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिसोदिया और अधिवक्ता अनिल भंडारी ने दलील दी कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक निर्धारित है। ऐसे में दो वर्ष पहले नियुक्त सदस्यों का विस्तार न होने से कई लोक अदालतों की कार्यवाही ठप हो सकती है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और अन्य कानून अधिकारियों ने तर्क दिया कि इन सदस्यों की नियुक्ति एक वर्ष के लिए की गई थी और एक बार विस्तार भी दिया जा चुका है, इसलिए अब नए सिरे से नियुक्ति की जानी चाहिए।
प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता संदीप पाठक ने नियमानुसार सेवा विस्तार का समर्थन किया।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य में वर्तमान में 36 स्थायी लोक अदालतें कार्यरत हैं और प्रत्येक के लिए न्यूनतम दो सदस्यों का कोरम आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए कि कोरम के अभाव में किसी भी लोक अदालत की न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो।
अंततः अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जिन 9 सदस्यों का कार्यकाल फरवरी में समाप्त हो चुका है, उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से बढ़ाई जाएं, ताकि न्यायिक कार्य सुचारु रूप से जारी रह सके।