लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली। विश्व मगरमच्छ दिवस (17 जून) के अवसर पर भारत अपनी ऐतिहासिक मगरमच्छ संरक्षण परियोजना (Crocodile Conservation Project-CCP) के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। वर्ष 1975 में शुरू की गई इस परियोजना ने देश में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके मगरमच्छों के संरक्षण और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता ओडिशा में देखने को मिली, जो आज भारत के मगरमच्छ संरक्षण प्रयासों का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विशेष रूप से भितरकनिका क्षेत्र में खारे पानी के मगरमच्छों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा घड़ियाल और मगर प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी व्यापक कार्यक्रम चलाए गए।
पिछले पांच दशकों में वैज्ञानिक प्रबंधन, कृत्रिम प्रजनन केंद्रों, आवास संरक्षण और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से मगरमच्छों की संख्या में सुधार हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत के सबसे सफल वन्यजीव संरक्षण अभियानों में से एक है।
विश्व मगरमच्छ दिवस के अवसर पर पर्यावरणविदों ने जैव विविधता संरक्षण और जल-आधारित पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही भविष्य में संरक्षण प्रयासों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।