लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
भुवनेश्वर: ओडिशा में सरकारी डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। इसी बीच एक सरकारी अस्पताल में एक किशोर का शव पोस्टमॉर्टम नहीं होने के कारण लंबे समय तक पड़ा रहा, जिससे परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना ने राज्य में जारी डॉक्टरों की हड़ताल के असर और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, किशोर की मौत के बाद परिजन शव का पोस्टमॉर्टम कराकर अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के चलते आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। इससे शव अस्पताल में ही पड़ा रहा और परिवार को घंटों इंतजार करना पड़ा। परिजनों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (OMSA) के बैनर तले सरकारी डॉक्टर विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कैडर पुनर्गठन, पारदर्शी तबादला नीति, बीमा सुविधा, प्रोत्साहन राशि और अन्य सेवा संबंधी सुधार शामिल हैं। हड़ताल के कारण राज्य के कई जिला अस्पतालों और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी और नियमित चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि कई स्थानों पर आपातकालीन सेवाएं और संविदा डॉक्टरों के माध्यम से आवश्यक इलाज जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण पोस्टमॉर्टम सहित कई नियमित प्रक्रियाओं में देरी हो रही है। सरकार और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं ताकि जल्द से जल्द गतिरोध समाप्त कर स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य किया जा सके। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार ने डॉक्टरों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है, जबकि डॉक्टर अपनी मांगों के समाधान पर अड़े हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि मरीजों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और समाधान निकालने के लिए प्रयास कर रहा है।