लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के एक न्यायिक अधिकारी को कथित तौर पर भीड़ के गुस्से, धमकियों और सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियान का सामना करना पड़ा है। इस घटना के बाद न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को डराने-धमकाने की कोशिश न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती है। संगठन ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
गौरतलब है कि न्यायाधीशों और अदालतों की सुरक्षा से जुड़े एक स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से लंबित है। यह मामला आखिरी बार मार्च 2025 में सूचीबद्ध हुआ था, लेकिन इसके बाद इसमें कोई विशेष प्रगति नहीं हुई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना निष्पक्ष न्याय व्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है। इस घटना ने एक बार फिर न्यायपालिका की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।