लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
लेह (लद्दाख): लद्दाख की संवेदनशील उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 100 पूर्व सैनिकों को पर्यावरण संरक्षण बल (Environment Protection Force-EPF) में तैनात किया है। यह देश में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना, वन्यजीवों की रक्षा करना और बढ़ते पर्यटन के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इन पूर्व सैनिकों को उनके तैनाती स्थलों के लिए रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे संवेदनशील उच्च हिमालयी पारिस्थितिक क्षेत्रों में से एक है और यहां दुर्लभ वन्यजीवों तथा जैव विविधता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है और EPF इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
EPF में शामिल पूर्व सैनिक भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स से जुड़े रहे हैं। इन्हें पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जहां वे अवैध ऑफ-रोडिंग, संरक्षित क्षेत्रों में अनधिकृत कैंपिंग, प्लास्टिक कचरा फैलाने और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर नजर रखेंगे। उन्हें नियमों के उल्लंघन पर मौके पर ही चालान जारी करने का अधिकार भी दिया गया है।
प्रशासन का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि पूर्व सैनिकों को समाज सेवा का एक नया अवसर भी प्रदान करेगी। प्रत्येक सदस्य को मासिक मानदेय दिया जाएगा और उन्हें उनके स्थानीय क्षेत्रों के आसपास तैनात किया जाएगा ताकि वे अपनी भौगोलिक जानकारी का बेहतर उपयोग कर सकें। इसके साथ ही सभी सदस्यों ने एकल-उपयोग प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने की शपथ भी ली।