लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
अमृतसर। वर्षों तक भारतीय सेना में देश की सेवा करने के बाद गुरबिंदर सिंह ने एक नया मिशन चुना—लोगों तक स्वस्थ और रसायनमुक्त भोजन पहुंचाना। अपने परिवार के लिए जैविक फसल उगाने से शुरू हुई उनकी पहल आज एक सफल उद्यम का रूप ले चुकी है, जो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को प्रेरित कर रही है।
गुरदासपुर जिले के भगोवाला गांव के निवासी गुरबिंदर सिंह वर्तमान में अमृतसर के बाहरी क्षेत्र स्थित गुमटाला गांव में खेती कर रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने केवल अपने परिवार के लिए जैविक उत्पाद उगाए, लेकिन जब दोस्तों और रिश्तेदारों को उनके उत्पादों की गुणवत्ता का पता चला तो मांग लगातार बढ़ने लगी।
बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने लोहारका रोड पर ‘किसान हट’ की स्थापना की। यहां वह जैविक तरीके से उगाए गए गेहूं की विभिन्न किस्में, हल्दी, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसाले और अन्य कृषि उत्पाद बेचते हैं। उनकी खासियत यह है कि वह फसलों की प्रोसेसिंग स्वयं करते हैं और उपभोक्ताओं को सीधे खेत से उत्पाद उपलब्ध कराते हैं।
गुरबिंदर सिंह केवल खेती तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपने फार्म पर 15 देशी गायें भी पाल रखी हैं। उनका कहना है कि विदेशी नस्ल की HF गायों की तुलना में देशी गायें कम दूध देती हैं, लेकिन उनका दूध अधिक पौष्टिक और खनिजों से भरपूर होता है।
वह 100 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेचते हैं। गुरबिंदर के अनुसार, उन्हें ग्राहकों की तलाश नहीं करनी पड़ती, बल्कि लोग खुद उनके फार्म पर पहुंचते हैं। कई बार मांग उपलब्धता से भी ज्यादा होती है।
अपने खेत में गुरबिंदर पांच-पांच किस्म के गेहूं और हल्दी की खेती करते हैं। इसके अलावा सौंफ, कलौंजी, तिल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, अलसी और कई प्रकार के मोटे अनाज भी उगाते हैं।
पूर्व सैनिक गुरबिंदर सिंह का मानना है कि खेती का भविष्य नवाचार और वैल्यू एडिशन में है। उनका कहना है कि किसानों को केवल मंडियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। साथ ही उपभोक्ताओं को भी स्वस्थ भोजन उगाने वाले किसानों का समर्थन करना चाहिए।