लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टिशन स्टडीज (CIPS) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए विभाजन के दौरान जीवित रहे लोगों की 100वीं मौखिक गवाही (survivor story) को रिकॉर्ड कर लिया है। यह पहल 1947 के भारत विभाजन से जुड़ी मानवीय कहानियों, अनुभवों और ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
विश्वविद्यालय के अनुसार यह परियोजना उन लोगों की आवाज़ों को संजोने का प्रयास है जिन्होंने विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा, संघर्ष और नए जीवन की शुरुआत जैसे कठिन अनुभवों को झेला। इन कहानियों को रिकॉर्ड कर एक डिजिटल और शोध-आधारित संग्रह तैयार किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को सीधे गवाहों की जुबानी समझ सकें।
सेंटर का कहना है कि अब तक कई राज्यों और समुदायों से जुड़े बुजुर्गों की कहानियां दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें उनके अपने घरों को छोड़ने की मजबूरी, सीमा पार करने के संघर्ष, परिवारों के बिछड़ने और फिर नए स्थानों पर जीवन बसाने की यादें शामिल हैं। यह पहल केवल इतिहास का दस्तावेजीकरण नहीं बल्कि एक मानवीय स्मृति संग्रह भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार विभाजन के प्रत्यक्ष गवाह अब बहुत सीमित संख्या में बचे हैं, ऐसे में उनकी कहानियों को रिकॉर्ड करना ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह प्रयास न केवल शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है, बल्कि समाज को अतीत की त्रासदी और उसके प्रभावों को समझने में भी मदद करता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय का यह केंद्र डिजिटल आर्काइव, इंटरव्यू रिकॉर्डिंग और शोध कार्यों के माध्यम से विभाजन अध्ययन को नई दिशा दे रहा है। संस्थान का उद्देश्य इन मौखिक इतिहासों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना है ताकि इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखा जाए।
इस उपलब्धि के साथ सेंटर ने विभाजन की स्मृतियों को संरक्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है और आने वाले समय में और अधिक कहानियों को रिकॉर्ड करने की योजना पर काम जारी है।