लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: करीब तीन साल के अंतराल के बाद दिल्ली सरकार ने दिल्ली आयोग फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) का पुनर्गठन कर इसे फिर से सक्रिय कर दिया है। सरकार ने आयोग के लिए एक अध्यक्ष और चार सदस्यों की नियुक्ति की है, जिससे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनसे जुड़े मामलों की निगरानी करने वाला यह वैधानिक निकाय दोबारा कामकाज शुरू करेगा।
DCPCR क्या है?
दिल्ली आयोग फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत गठित एक वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना, बाल उत्पीड़न, बाल तस्करी, बाल श्रम, शिक्षा, किशोर न्याय, लापता बच्चों और POCSO Act से जुड़े मामलों की निगरानी करना तथा सरकार को आवश्यक सुझाव देना है।
आयोग का पुनर्गठन ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। NCRB की 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पिछले वर्ष बच्चों के खिलाफ 7,662 अपराध दर्ज किए गए। इनमें 5,404 मामले अपहरण और किडनैपिंग के थे, जो सबसे बड़ी श्रेणी रही। इन आंकड़ों के कारण बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
यह फैसला दिल्ली सरकार के उस हालिया निर्देश के बाद आया है, जिसमें राजधानी के 5,633 सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को जुलाई के अंत तक चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी (Child Protection Committee) गठित करने का आदेश दिया गया था। सरकार का मानना है कि स्कूल स्तर पर सुरक्षा तंत्र मजबूत होने और DCPCR के दोबारा सक्रिय होने से बच्चों से जुड़े मामलों की निगरानी और शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी।
नवनियुक्त अध्यक्ष ओम प्रकाश व्यास ने पदभार संभालने के बाद कहा कि आयोग की प्राथमिकता POCSO कानून के उल्लंघन, बाल श्रम और बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर प्रभावी कार्रवाई करना होगी। उन्होंने कहा कि आयोग केवल शिकायतों का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वयं संज्ञान लेकर भी कार्रवाई करेगा और जमीनी स्तर पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
सरकार का कहना है कि आयोग के दोबारा सक्रिय होने से बच्चों के अधिकारों की रक्षा, स्कूल सुरक्षा, बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और संवेदनशील मामलों की निगरानी को नई मजबूती मिलेगी।