लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि स्वच्छ और पीने योग्य पानी तक पहुंच प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। अदालत ने महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में जल संकट पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से पूछा कि इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक किया जाएगा।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ अमरावती जिले के आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण के कारण शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की मौत से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से जुड़ी हुई है। यदि लोगों को सुरक्षित पेयजल नहीं मिलता है तो इसका असर सबसे अधिक बच्चों और महिलाओं पर पड़ता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जल संकट की समस्या को दूर करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं और इस समस्या के समाधान की संभावित समयसीमा क्या है। अदालत ने संकेत दिया कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मेलघाट क्षेत्र लंबे समय से कुपोषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। सुनवाई के दौरान इन मुद्दों के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता का प्रश्न भी प्रमुखता से उठा।
अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।