लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
पश्चिम बंगाल में आयोजित Re-NEET परीक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एक महिला अभ्यर्थी, हृषिका पाल (Hrishika Pal), ने आरोप लगाया है कि परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा जांच के दौरान उससे अपनी पैंट नीचे करने के लिए कहा गया। कथित तौर पर यह जांच इस बात की पुष्टि करने के लिए की गई थी कि वह सैनिटरी पैड पहने हुए है या नहीं।
हृषिका पाल ने दावा किया कि इस घटना ने उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचाया और वह खुद को बेहद अपमानित महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि परीक्षा केंद्र पर यह प्रक्रिया केवल उन छात्राओं के साथ अपनाई गई जिन्होंने सुरक्षा कर्मियों को बताया था कि वे मासिक धर्म (पीरियड्स) से गुजर रही हैं।
अन्य केंद्रों की छात्राओं ने नहीं बताई ऐसी घटना
हृषिका ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर Re-NEET देने वाली कई अन्य छात्राओं से बातचीत की। उनके अनुसार किसी भी अन्य केंद्र पर छात्राओं से पीरियड्स को लेकर सवाल नहीं पूछे गए और न ही इस प्रकार की जांच की गई।
उनका आरोप है कि उनके परीक्षा केंद्र पर पीरियड्स की जानकारी देने वाली छात्राओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, जिससे महिला अभ्यर्थियों की गरिमा और निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर भड़का आक्रोश
घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों, अभिभावकों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कथित घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कई लोगों का कहना है कि परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर किसी भी अभ्यर्थी की निजता और सम्मान से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर परीक्षा केंद्र प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है।
जांच और दिशा-निर्देशों की मांग
इस विवाद के बाद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि महिला उम्मीदवारों की गरिमा और गोपनीयता की रक्षा के लिए स्पष्ट और संवेदनशील दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए।
फिलहाल संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच के तौर-तरीकों को लेकर बड़ा सवाल बन सकता है।