लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
गुरप्रीत कालरा
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के मिसाइल और ड्रोन हथियार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। ईरान के पास अलग-अलग रेंज और क्षमताओं वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ ड्रोन सिस्टम भी हैं, जिनका इस्तेमाल क्षेत्रीय संघर्षों में किया जाता रहा है।
अमेरिका के सहयोगी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन हमलों को समय रहते पहचानना और उन्हें रोकना है। बैलिस्टिक मिसाइलों की तेज गति और अलग-अलग प्रकार के ड्रोन से आने वाले हमलों के कारण एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है।
हालांकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पास Patriot, THAAD और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक मौजूद है, लेकिन किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता असीमित नहीं होती। बड़े पैमाने पर एक साथ किए गए हमलों में कई स्तरों वाली रक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ती है।
ईरान की मिसाइल क्षमता में शॉर्ट, मीडियम और लंबी दूरी की कई मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा ईरान ने ड्रोन तकनीक पर भी काफी जोर दिया है। कम लागत वाले ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किसी भी रक्षा प्रणाली के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
इसी वजह से मध्य पूर्व में ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार अपनी एयर डिफेंस रणनीति मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। मौजूदा तनाव के बीच ईरानी हथियारों की क्षमता और उन्हें रोकने की चुनौती आने वाले समय में भी चर्चा का बड़ा विषय बनी रह सकती है।