लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुभेंदु अधिकारी ऐसा नाम बन चुके हैं, जिसने पिछले कुछ वर्षों में राज्य की सियासत की दिशा बदल दी। कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले शुभेंदु अब उनके सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी बन चुके हैं।
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर बड़ा जनाधार तैयार किया और राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
शुभेंदु अधिकारी लगातार कई बार विधायक और सांसद रहे। वे ममता सरकार में परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण बंगाल में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
साल 2020 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। इसके बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को कड़े मुकाबले में हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।
BJP ने उन्हें बंगाल में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बनाया और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी। हिंदुत्व, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर वे लगातार ममता सरकार को घेरते रहे हैं।
अब 2026 विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो यह बंगाल की राजनीति में एक बड़े सत्ता परिवर्तन का प्रतीक माना जाएगा।