गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में QUAD को लेकर भारत की भूमिका पर नई बहस शुरू हो गई है। हाल के कुछ घटनाक्रमों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भारत अब अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ बने इस रणनीतिक समूह में पहले जैसी आक्रामक सक्रियता नहीं दिखा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली अब अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अधिक संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना चाहती है।
दरअसल QUAD का गठन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के उद्देश्य से मजबूत किया गया था। लेकिन भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि वह किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं है। विदेश मंत्री S. Jaishankar कई बार कह चुके हैं कि भारत “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर चलता है और किसी एक ब्लॉक की राजनीति में बंधना नहीं चाहता।
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और चीन के साथ सीमा तनाव जैसे मुद्दों ने भारत को अधिक सतर्क बना दिया है। ऐसे में भारत उन वैश्विक संघर्षों में सीधे शामिल होने से बचना चाहता है जिनसे उसके आर्थिक या सुरक्षा हित प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर QUAD से दूरी बनाने जैसी कोई घोषणा नहीं की है। हाल के महीनों में QUAD देशों की कई बैठकों में भारत की भागीदारी भी देखी गई है। इसलिए “QUAD से पिंड छुड़ाने” जैसे दावों को फिलहाल राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषण के तौर पर ही देखा जा रहा है, न कि किसी आधिकारिक नीति बदलाव के रूप में।