लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा के नए सत्र की शुरुआत एक महत्वपूर्ण बदलाव के साथ हुई। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को सबसे पहले प्रस्तुत किया गया। यह कदम मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गीतों के क्रम को लेकर उठे विवाद के बाद उठाया गया है।
दरअसल, मई 2026 में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान के बाद प्रस्तुत किया गया था। इस क्रम को लेकर विपक्षी दलों और तमिल सांस्कृतिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि तमिलनाडु के सरकारी आयोजनों में परंपरागत रूप से ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती रही है।
विवाद बढ़ने के बाद सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने घोषणा की थी कि भविष्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को पहले और राष्ट्रगान को अंत में रखा जाएगा। पार्टी महासचिव आधव अर्जुना ने इसे तमिलनाडु की स्थापित परंपरा बताते हुए आगे से इसी प्रोटोकॉल का पालन करने का आश्वासन दिया था।
गुरुवार को शुरू हुए विधानसभा सत्र में इसी आश्वासन को अमल में लाया गया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर के अभिभाषण से पहले ‘तमिल थाई वाझ्थु’ गाया गया, जिससे सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की कि वह तमिल पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान को प्राथमिकता देती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल विवाद को शांत करने का प्रयास है, बल्कि तमिलनाडु की क्षेत्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। हाल के दिनों में भाषा नीति और तमिल पहचान से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।
विधानसभा के इस सत्र में भाषा नीति, राज्य अधिकारों और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में सत्र की शुरुआत में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को प्राथमिकता देना प्रतीकात्मक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।