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भूपेंद्र यादव के कार्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, निजी सचिव समेत तीन करीबी अधिकारी हटाए गए

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय से निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। सरकार ने आदेश जारी किए हैं, हालांकि इस कार्रवाई का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

By : Local News of India

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को तत्काल प्रभाव से हटाया गया।

लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 
ऋचा बर्नवाल 

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। सरकार ने मंत्री के निजी सचिव (Private Secretary) और दो अतिरिक्त निजी सचिवों (Additional Private Secretaries) को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है। इस संबंध में 3 जुलाई को अलग-अलग कार्यालय आदेश जारी किए गए। हालांकि, इन फैसलों के पीछे की वजह सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है।

जारी आदेशों के अनुसार, भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 2010 बैच के अधिकारी अमर सिंह, जो केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव के रूप में कार्यरत थे, उन्हें "प्रशासनिक आधार" (Administrative Ground) पर उनके मूल विभाग, राजस्व विभाग (Department of Revenue) में वापस भेज दिया गया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त भी कर दिया गया। अमर सिंह पहले भी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में भूपेंद्र यादव के निजी सचिव रह चुके थे।

इसके अलावा, अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले उनके मूल कैडर, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) में प्रतिनियुक्ति समाप्त कर वापस भेज दिया गया है। वहीं, एक अन्य अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सारण की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। तीनों अधिकारियों को एक साथ हटाए जाने को मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्रालय या केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय की ओर से अभी तक इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यही कारण है कि इन आदेशों के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर फिलहाल केवल अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार के आदेशों में भी किसी विशेष कारण का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है।

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि किसी केंद्रीय मंत्री के कार्यालय से एक साथ तीन वरिष्ठ सहयोगियों को हटाया जाना असामान्य कदम माना जाता है। ऐसे मामलों में सामान्यतः बाद में नई नियुक्तियों या प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। फिलहाल इस मामले पर आगे की सरकारी प्रतिक्रिया और नए अधिकारियों की नियुक्ति का इंतजार किया जा रहा है।

 

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