गुरपीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। बुधवार 23 सितंबर को Brent करीब 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि WTI भी करीब 90 डॉलर के स्तर पर रहा।
तेल की कीमतों में यह नरमी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की दिशा में गति बन रही है और तेल की कीमतों में जल्द तेज गिरावट आ सकती है।
ट्रंप का बयान और बाजार का रुख
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने एक तरफ ईरान के खिलाफ कड़े बयान दिए, वहीं अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत को सकारात्मक बताया। उनके मुताबिक बातचीत में कई चीजें अच्छी तरह आगे बढ़ीं और समझौते की संभावना बनी हुई है।
बाजार ने इस घटनाक्रम को संभावित तनाव कम होने के संकेत के तौर पर लिया। इससे तेल की भविष्य की सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई और कीमतों पर दबाव आया।
सऊदी अरब की सप्लाई भी बनी वजह
तेल की कीमतों में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह सऊदी अरब की East-West Pipeline से जुड़ी खबर है। सऊदी अरब ने इस महत्वपूर्ण पाइपलाइन पर संचालन बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इससे क्षेत्र से तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद बनी है।
इसके अलावा ईरान की ओर से Strait of Hormuz को दोबारा खोलने को लेकर सामने आए संकेतों ने भी बाजार में सप्लाई की चिंता को प्रभावित किया है। हालांकि इस संबंध में सामने आई कुछ रिपोर्टों का ईरानी पक्ष ने खंडन भी किया है, इसलिए स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
Brent फिर 100 डॉलर के नीचे
मंगलवार को Brent Crude करीब 99.25 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह 8 सितंबर के बाद पहली बार था जब Brent का बंद भाव 100 डॉलर से नीचे आया। बुधवार को भी इसमें मामूली नरमी देखने को मिली।
हालांकि बाजार अभी भी बेहद संवेदनशील है। अमेरिका-ईरान संघर्ष, Strait of Hormuz से जुड़ी स्थिति और मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई में किसी भी बदलाव का असर कीमतों पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल तेल बाजार में दो तरह के संकेत दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ अमेरिका-ईरान बातचीत और क्षेत्र से सप्लाई बढ़ने की उम्मीद कीमतों पर दबाव बना रही है, वहीं दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
इसलिए आने वाले दिनों में Brent Crude की कीमतें बातचीत की प्रगति, तेल सप्लाई और Strait of Hormuz की स्थिति से प्रभावित हो सकती हैं।