लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान के बीच बढ़ती नजदीकी ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। इस बदलाव को लेकर इसराइल में चिंता देखी जा रही है, क्योंकि तुर्की और इसराइल के रिश्ते पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण रहे हैं।
इसराइल की सबसे बड़ी चिंता तुर्की की सैन्य क्षमता को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने की संभावना, जिसमें एफ-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री जैसे मुद्दे शामिल हैं, इसराइल के लिए संवेदनशील विषय है। इसराइल को डर है कि इससे क्षेत्र में सैन्य संतुलन बदल सकता है।
इसके अलावा, गाजा युद्ध और क्षेत्रीय मुद्दों पर एर्दोगान का रुख इसराइल के लिए एक बड़ी वजह है। तुर्की ने कई मौकों पर इसराइल की नीतियों की आलोचना की है, जबकि इसराइल तुर्की को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में करीब से देखता है।
ट्रंप की नीति भी इस मामले को जटिल बनाती है। वह एक ओर इसराइल के साथ अपने संबंध बनाए रखना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर तुर्की को नाटो सहयोगी और क्षेत्रीय प्रभाव वाले देश के रूप में महत्व देते हैं। इसी संतुलन के कारण वॉशिंगटन की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं।
इसराइल को यह आशंका है कि अगर अमेरिका-तुर्की संबंध और मजबूत होते हैं, तो मध्य पूर्व में कूटनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के एर्दोगान से अच्छे संबंध तनाव कम करने के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।