लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने 7 जुलाई 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान TribeX डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारत की जनजातीय कला, भाषाओं, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को डिजिटल माध्यम से संरक्षित और लोगों तक पहुंचाना है।
TribeX प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में जनजातीय चित्रकला, हस्तशिल्प और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से जुड़े 20 निशुल्क सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। इसके अलावा जनजातीय भाषाओं, कला रूपों, शिल्प और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मान्यता प्राप्त पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
यह प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को जनजातीय ज्ञान रखने वाले विशेषज्ञों और मास्टर कारीगरों से जोड़ने का काम करेगा। इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग ऑनलाइन माध्यम से जनजातीय परंपराओं और कौशल को सीख सकेंगे।
TribeX में एक हेरिटेज आर्काइव भी शामिल है, जिसमें 5,000 से अधिक मल्टीमीडिया संसाधन मौजूद हैं। इसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो और साहित्यिक सामग्री शामिल है। भविष्य में प्लेटफॉर्म पर कोर्स की संख्या 100 से अधिक और डिजिटल संसाधनों की संख्या 10,000 से ज्यादा करने की योजना है।
इस परियोजना के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय और वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) भी किया गया है। इसके तहत UGC मान्यता प्राप्त पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे।
TribeX भारत की जनजातीय विरासत को डिजिटल युग में संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।