लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
फिल्म 'दिल्ली-6' का सुपरहिट गीत 'ससुराल गेंदा फूल' आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गीत मूल रूप से छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय लोकगीत है, जिसे बाद में बॉलीवुड के लिए नए अंदाज में प्रस्तुत किया गया।
लोक मान्यता के अनुसार, इस गीत की जड़ें छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में हैं। इसका मूल छत्तीसगढ़ी रूप 'करार गोंदा फूल' के नाम से जाना जाता है। इस लोकगीत में नई दुल्हन के ससुराल के अनुभव, परिवार के अलग-अलग सदस्यों के स्वभाव और रिश्तों की मिठास को बेहद सरल और भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।
साल 2009 में फिल्म 'दिल्ली-6' के लिए संगीतकार ए.आर. रहमान ने इस लोकधुन को नए संगीत के साथ प्रस्तुत किया। गीतकार प्रसून जोशी ने इसके बोलों को हिंदी फिल्म के अनुरूप ढाला, जबकि इसकी लोकभावना और मूल आत्मा को बरकरार रखा। यही वजह है कि यह गीत देशभर में लोकप्रिय हो गया।
'गेंदा फूल' का प्रतीक भी बेहद खास माना जाता है। गेंदे का फूल हर मौसम में खिलने, आसानी से हर माहौल में ढलने और पूजा से लेकर उत्सव तक हर जगह उपयोग होने के कारण नई दुल्हन के जीवन और ससुराल में उसके नए रिश्तों का प्रतीक माना जाता है। इसी भाव को लोकगीत में खूबसूरती से पिरोया गया है।
आज 'ससुराल गेंदा फूल' केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक विरासत का प्रतीक माना जाता है। यह गीत इस बात का उदाहरण है कि भारतीय लोकसंगीत किस तरह समय के साथ नए रूप में दुनिया भर के श्रोताओं तक पहुंच सकता है।