लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
दिलजीत दोसांझ और अर्जुन रामपाल स्टारर फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने खुलकर फिल्म का समर्थन किया है और इसे भारतीय इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय को सामने लाने वाली महत्वपूर्ण फिल्म बताया है।
राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि "'सतलुज' कोई फिल्म नहीं, बल्कि ऐसा गहरा जख्म है जो कभी नहीं भर सकता।" उन्होंने कहा कि यह फिल्म इतिहास के सबसे अंधेरे दौर में झांकने का मौका देती है और दर्शकों को असहज करने वाली सच्चाइयों से रूबरू कराती है।
उन्होंने अभिनेता दिलजीत दोसांझ की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि फिल्म में उनका अभिनय बेहद संयमित और प्रभावशाली है। वर्मा के अनुसार, दिलजीत का किरदार किसी पारंपरिक नायक की तरह नहीं, बल्कि अपने जमीर और सच के सहारे लड़ने वाले इंसान की तरह सामने आता है। वहीं अर्जुन रामपाल के अभिनय को भी उन्होंने संस्थागत तंत्र की कठोर वास्तविकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने वाला बताया।
निर्देशक हनी त्रेहान की सराहना करते हुए राम गोपाल वर्मा ने कहा कि उन्होंने इस संवेदनशील विषय को सनसनीखेज बनाने के बजाय गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। उनके मुताबिक, फिल्म धीरे-धीरे एक जांच आधारित कहानी की तरह आगे बढ़ती है और दर्शकों को खुद सोचने के लिए प्रेरित करती है।
अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने भावुक अपील करते हुए लिखा, "सतलुज के साथ वही मत कीजिए जो जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था।" उन्होंने कहा कि किसी भी कला को दबाने की कोशिश करने के बजाय उस पर चर्चा और बहस होनी चाहिए, क्योंकि सच्चाई को हमेशा के लिए छिपाया नहीं जा सकता।
फिल्म 'सतलुज', जिसे पहले 'पंजाब 95' के नाम से जाना जाता था, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। फिल्म के ZEE5 से हटाए जाने के बाद यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट नियमन को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।