लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म 'सतलुज' के चर्चा में आने के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी और उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा की लंबी कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुर्खियों में है। खालड़ा ने पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और गुमशुदगी के मामलों को सामने लाने का काम किया था।
जसवंत सिंह खालड़ा सितंबर 1995 में लापता हुए थे। जांच और अदालती कार्यवाही के दौरान आरोप सामने आए कि उन्हें पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों ने अगवा किया और उनकी हत्या की। उनकी पत्नी परमजीत कौर ने इस मामले में लगातार न्याय की लड़ाई जारी रखी और गवाहों व कानूनी प्रक्रिया के जरिए केस को आगे बढ़ाया।
करीब एक दशक से ज्यादा चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 2005 में छह पुलिस अधिकारियों को खालड़ा के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया। इनमें कुछ अधिकारियों को उम्रकैद और अन्य को अलग-अलग सजा सुनाई गई। बाद में उच्च अदालतों में भी मामले की सुनवाई हुई और कई सजाओं को बरकरार रखा गया।
परमजीत कौर को इस मुकदमे के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मामले से जुड़े गवाहों और परिवार पर दबाव डालने के आरोप भी सामने आए थे। इसके बावजूद उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखी।
जसवंत सिंह खालड़ा का मामला पंजाब के इतिहास में मानवाधिकार और जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में गिना जाता है। उनकी पत्नी परमजीत कौर की भूमिका इस मामले में न्याय की मांग करने वाले अभियान का अहम हिस्सा रही।