लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
नई दिल्ली। फेफड़ों से जुड़ी बीमारी पल्मोनरी सारकॉइडोसिस की निगरानी के लिए नई मेडिकल रिसर्च में MRI तकनीक को एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक बिना किसी रेडिएशन के मरीजों की स्थिति पर नजर रखने में मदद कर सकती है।
अभी तक इस बीमारी की निगरानी के लिए कई मामलों में CT स्कैन जैसी रेडिएशन आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन MRI के उपयोग से बार-बार होने वाले रेडिएशन एक्सपोजर से बचा जा सकता है, जो मरीजों के लिए सुरक्षित माना जाता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि MRI तकनीक फेफड़ों में होने वाले बदलावों को अधिक सटीक तरीके से समझने में मदद कर सकती है। इससे डॉक्टरों को इलाज की योजना बनाने में भी बेहतर सहायता मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह अध्ययन भविष्य में पल्मोनरी सारकॉइडोसिस के निदान और निगरानी के तरीके को बदल सकता है।