लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
देश में सबसे अधिक बुज़ुर्ग आबादी वाले राज्यों में शामिल केरल वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और उनके अकेलेपन को कम करने के लिए लगातार नई पहल कर रहा है। बदलती पारिवारिक व्यवस्था और युवाओं के दूसरे शहरों या विदेशों में बसने के कारण बड़ी संख्या में बुज़ुर्ग अकेले रहने को मजबूर हैं।
इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय निकायों ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें नियमित स्वास्थ्य जांच, घर-घर जाकर देखभाल, डे-केयर सेंटर, सामुदायिक गतिविधियां, हेल्पलाइन सेवाएं और स्वयंसेवकों के माध्यम से बुज़ुर्गों से नियमित संपर्क जैसी पहल शामिल हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ चिकित्सा सुविधा देना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक रूप से सक्रिय रखना और उन्हें मानसिक अकेलेपन से बाहर निकालना भी है। कई स्थानों पर स्वयंसेवक बुज़ुर्गों से मिलकर बातचीत करते हैं, उनकी जरूरतों को समझते हैं और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से कई बुज़ुर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्हें सामाजिक जुड़ाव, भावनात्मक सहयोग और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। हालांकि, तेजी से बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी, सीमित संसाधन और प्रशिक्षित देखभाल कर्मियों की कमी जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, समाज और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है ताकि कोई भी बुज़ुर्ग खुद को अकेला महसूस न करे। केरल का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण माना जा रहा है।