लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा माने जाने वाले सूफियाना संगीत को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल कराने की पहल तेज हो गई है। यह संगीत परंपरा 14वीं और 15वीं शताब्दी के बीच विकसित मानी जाती है और इसे कश्मीर की प्राचीन संगीत परंपराओं तथा सूफी दर्शन का अनूठा संगम माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सूफियाना संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना, सांस्कृतिक संवाद और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। इसकी धुनों और काव्य परंपरा में कश्मीर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान झलकती है।
यूनेस्को की सूची में शामिल होने से इस कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ-साथ इसके संरक्षण, शोध और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। इससे पारंपरिक कलाकारों और संगीत गुरुओं को वैश्विक मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूफियाना संगीत को यूनेस्को की मान्यता मिलती है, तो यह न केवल कश्मीर बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगी।