लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा होने के बाद राजनीतिक हलकों में इसके मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इस फेरबदल के जरिए सरकार और संगठन दोनों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।
मंत्रालयों के आवंटन में कुछ नेताओं का कद बढ़ता दिखा, जबकि कुछ मंत्रियों के प्रभाव में कमी आने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन नेताओं को अहम विभाग दिए गए हैं, उन्हें सरकार के भीतर ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावशाली माना जा रहा है। वहीं कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिनसे महत्वपूर्ण विभाग वापस लिए गए या अपेक्षाकृत कम प्रभाव वाले मंत्रालय दिए गए।
कैबिनेट विस्तार और विभाग वितरण में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर भी खास ध्यान दिया गया है। BJP की कोशिश है कि 2024 लोकसभा चुनाव में जिन सामाजिक समीकरणों में कमजोरी दिखी, उन्हें 2027 से पहले मजबूत किया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि OBC, दलित और सवर्ण वोट बैंक के बीच संतुलन साधने की रणनीति इस बंटवारे में साफ दिखाई देती है। साथ ही संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं को भी जगह दी गई है।
कुछ मंत्रियों को प्रदर्शन के आधार पर मजबूत विभाग मिलने की चर्चा है, जबकि कुछ नेताओं के विभागों में कटौती को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि Yogi Adityanath ने इस बंटवारे के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार में अंतिम निर्णय और शक्ति संतुलन अब भी उनके हाथ में है।