लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
अदिति जैन
सूरत के NH-48 पर सावा-नंदाव ओवरब्रिज को बने करीब पांच साल बाद ही तोड़ने की नौबत ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह ब्रिज वर्ष 2021 में शुरू हुआ था और अब इसके मुख्य हिस्से को हटाने का काम किया जा रहा है।
ब्रिज के मुख्य हिस्से को तोड़ने की कार्रवाई के चलते यहां यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। वाहनों को फिलहाल सर्विस रोड की ओर डायवर्ट किया गया है, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पांच साल पुराने ओवरब्रिज को तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी। उपलब्ध रिपोर्टों में ब्रिज की गुणवत्ता और निर्माण से जुड़े सवाल उठाए गए हैं, हालांकि इसके सटीक तकनीकी कारण और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक स्तर पर और स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ओवरब्रिज का निर्माण हरियाणा की एक कंपनी ने किया था और कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की बात भी सामने आई है। इसी वजह से निर्माण एजेंसी, गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर पुल का निर्माण और गुणवत्ता परीक्षण तय मानकों के मुताबिक हुआ था, तो इतने कम समय में इसके मुख्य हिस्से को तोड़ने की स्थिति क्यों बनी। ब्रिज के निर्माण पर हुए खर्च और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ सकती है