लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
गहलोत ने लिखा कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत निजी अस्पतालों के बकाया भुगतान न होने से संकट की स्थिति बन गई है। निजी अस्पताल ओपीडी और फार्मेसी सेवाओं को बंद करने की तैयारी में हैं, जिससे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के सामने इलाज का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने चिरंजीवी (मां) योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इसे शिथिल कर दिया गया है, जिससे प्रदेशभर के अस्पतालों में इलाज में देरी और दवाइयों की कमी देखने को मिल रही है।
जयपुर के प्रमुख सरकारी और जनाना अस्पतालों में खून की भारी कमी को गहलोत ने “हेल्थ इमरजेंसी” जैसे हालात बताया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि निजी ब्लड बैंकों पर लगी रोक तुरंत हटाई जाए।
अपनी पोस्ट में उन्होंने चाकसू विधानसभा क्षेत्र के 108 वर्षीय बुजुर्ग गोलूराम माली से मुलाकात का भी जिक्र किया और गांव में स्वास्थ्य सहित अन्य योजनाओं के बंद होने को लेकर लोगों की नाराजगी बताई।
गहलोत ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वे सोशल मीडिया के जरिए जनता की समस्याएं उठाते हैं, तो समाधान निकालने के बजाय मुख्यमंत्री सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यक्तिगत टिप्पणियां करने में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि आलोचनाओं का जवाब देने की बजाय जमीनी स्तर पर बिगड़ते हालात सुधारने पर ध्यान दिया जाए।