गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Supreme Court of India में महिलाओं के खतना यानी FGM (Female Genital Mutilation) को लेकर सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली।
सुनवाई के दौरान एक पक्ष की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि यह प्रथा “यौन सुख बढ़ाने” से जुड़ी मान्यता पर आधारित है। इस टिप्पणी पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई और जस्टिस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए।
अदालत ने सुनवाई के दौरान महिलाओं के अधिकार, शारीरिक स्वायत्तता और संवैधानिक मूल्यों को लेकर कई अहम टिप्पणियां कीं। जस्टिस ने पूछा कि क्या किसी परंपरा या धार्मिक मान्यता के नाम पर महिलाओं के शरीर से जुड़ी ऐसी प्रक्रिया को उचित ठहराया जा सकता है।
FGM को लेकर लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से चिंता जताई जाती रही है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रथा महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह बहस अब केवल धार्मिक प्रथा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं के अधिकार, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों का रूप ले चुकी है।