लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Jangipara विधानसभा सीट इस चुनाव में बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय मुकाबले का केंद्र बन गई है। Hooghly जिले की यह सीट, जो Serampore लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, लंबे समय तक वामपंथ का गढ़ रही, लेकिन 2011 के बाद से All India Trinamool Congress ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।
पिछले करीब 15 वर्षों से Snehasis Chakraborty इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिससे उनका संगठनात्मक और प्रशासनिक प्रभाव क्षेत्र में गहरा माना जाता है।
इस बार चुनाव का मुख्य आकर्षण भाजपा उम्मीदवार Prasenjit Bag हैं, जो साधारण परिवार से आते हैं और आज भी मिट्टी के घर में रहते हैं। वे Rashtriya Swayamsevak Sangh से जुड़े रहे हैं और भाजपा संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी सादगी और जमीनी छवि को भाजपा ‘आम आदमी की पहचान’ के रूप में पेश कर रही है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार स्नेहाशीष चक्रवर्ती एक अनुभवी नेता हैं और राज्य के परिवहन मंत्री भी रह चुके हैं। पार्टी उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को अपनी ताकत के रूप में प्रचारित कर रही है, हालांकि कनेक्टिविटी और परिवहन सेवाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
इस सीट पर कांग्रेस ने अधिवक्ता शुभाशीष दत्ता को उम्मीदवार बनाया है, जबकि माकपा ने सुदीप्तो सरकार को मैदान में उतारा है, जिन्हें Indian Secular Front का समर्थन प्राप्त है। इससे अल्पसंख्यक वोटों में संभावित बंटवारा चुनाव को और रोचक बना रहा है।
जंगीपाड़ा का सामाजिक समीकरण भी चुनाव को खास बनाता है। यहां मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ ओबीसी और अनुसूचित जाति समुदाय निर्णायक भूमिका में हैं। कृषि, छोटे व्यापार और दिहाड़ी मजदूरी यहां की मुख्य आजीविका हैं।
इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला Furfura Sharif धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसका प्रभाव चुनावी नतीजों पर भी पड़ता है।
स्थानीय मुद्दों में कनेक्टिविटी सबसे बड़ा विषय बनकर उभरा है। लोगों का आरोप है कि परिवहन सुविधाओं और सड़क संपर्क में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है, जहां अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी बनी हुई है।
युवा मतदाताओं के लिए रोजगार एक बड़ा मुद्दा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग तेज है।
कुल मिलाकर, जंगीपाड़ा विधानसभा सीट का यह चुनाव अनुभव और सादगी के बीच सीधी टक्कर बन गया है। अब देखना होगा कि मतदाता किसे प्राथमिकता देते हैं।