गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नई दिल्ली: इंश्योरेंस सेक्टर में रेगुलेटरी बदलाव के प्रस्ताव ने शेयर बाजार में हलचल बढ़ा दी है। IRDAI यानी Insurance Regulatory and Development Authority of India के नए कंसल्टेशन पेपर के बाद गुरुवार, 24 सितंबर को बीमा कंपनियों और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
सबसे बड़ा झटका PB Fintech, यानी Policybazaar की पैरेंट कंपनी, को लगा। कंपनी का शेयर एक दिन में करीब 36% गिर गया और 52-वीक लो पर पहुंच गया। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी के मार्केट कैप से एक ही कारोबारी सत्र में करीब ₹31,426 करोड़ कम हो गए।
वहीं इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर Turtlemint का शेयर भी करीब 20% गिरा। HDFC Life, ICICI Prudential Life, SBI Life, LIC और अन्य बीमा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
आखिर IRDAI ने क्या प्रस्ताव दिया?
IRDAI ने इंश्योरेंस की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका एक अहम हिस्सा इंश्योरेंस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिए जाने वाले कमीशन से जुड़ा है।
प्रस्ताव में अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन की सीमा तय करने की बात है। रिपोर्टों के मुताबिक हेल्थ, टर्म और मोटर इंश्योरेंस जैसे सेगमेंट में प्रस्तावित बदलाव डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई पर असर डाल सकते हैं।
PB Fintech पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
PB Fintech पारंपरिक इंश्योरेंस कंपनी से अलग है। Policybazaar जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसी ग्राहकों तक पहुंचाई जाती हैं और कंपनी को डिस्ट्रीब्यूशन से आय होती है।
ऐसे में अगर किसी पॉलिसी की बिक्री पर मिलने वाला कमीशन कम होता है, तो प्रति पॉलिसी कंपनी की कमाई प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से निवेशकों ने PB Fintech के बिजनेस मॉडल पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई। ब्रोकरेज अनुमानों में कमीशन दरों में कटौती का कंपनी की कमाई पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
HDFC Life, SBI Life और LIC क्यों गिरे?
यहां मामला थोड़ा अलग है। HDFC Life, SBI Life, ICICI Prudential Life और LIC बीमा कंपनियां हैं, जबकि PB Fintech और Turtlemint मुख्य रूप से डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े कारोबार में हैं।
IRDAI के प्रस्ताव में Expense of Management यानी EoM से जुड़े नियमों में भी बदलाव की बात है। इसके अलावा कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव से बीमा कंपनियों के अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों की लागत और पॉलिसी बेचने की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इसका असर हर कंपनी पर एक जैसा नहीं होगा। किसी कंपनी के एजेंट नेटवर्क, बैंकिंग चैनल, ब्रोकर्स और दूसरे डिस्ट्रीब्यूशन माध्यमों पर निर्भरता के आधार पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
‘Dark Pattern’ क्या है?
IRDAI के प्रस्ताव का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा Dark Patterns से जुड़ा है।
सरल भाषा में समझें तो Dark Pattern ऐसे डिजिटल डिजाइन या तरीके होते हैं, जिनसे ग्राहक को किसी खास विकल्प की ओर इस तरह धकेला जा सकता है कि उसे पूरी और स्पष्ट जानकारी के साथ स्वतंत्र फैसला लेने में परेशानी हो।
IRDAI ने इंश्योरेंस वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे तरीकों पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही ग्राहक को प्रोडक्ट की कीमत और जरूरी जानकारी स्पष्ट तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
क्या प्रस्ताव से ग्राहकों को फायदा हो सकता है?
प्रस्ताव का उद्देश्य इंश्योरेंस की बिक्री को अधिक पारदर्शी बनाने और मिस-सेलिंग जैसी चिंताओं को कम करने की दिशा में बदलाव करना है। नियामक ने कमीशन और वितरण लागत को लेकर भी नए ढांचे का प्रस्ताव रखा है।
हालांकि कंपनियों के लिए इसका असर अलग-अलग हो सकता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कमीशन में कमी कमाई पर दबाव डाल सकती है, जबकि बीमा कंपनियों के मामले में कम डिस्ट्रीब्यूशन खर्च और ग्राहक हासिल करने की लागत के बीच संतुलन महत्वपूर्ण होगा।
क्या ये नियम लागू हो गए हैं?
नहीं। अभी यह IRDAI का प्रस्ताव/कंसल्टेशन पेपर है। संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी गई हैं और रिपोर्टों के मुताबिक टिप्पणियां जमा करने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 है। इसलिए शेयर बाजार में हुई गिरावट प्रस्ताव के संभावित असर को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया है, न कि किसी अंतिम नियम के तत्काल लागू होने का परिणाम।
अब आगे क्या?
IRDAI के अंतिम नियम आने के बाद ही यह साफ होगा कि कमीशन, EoM और डिजिटल इंश्योरेंस बिक्री के नियमों में अंतिम रूप से क्या बदलाव होते हैं।
फिलहाल बाजार की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि प्रस्तावित कमीशन सीमा से PB Fintech और दूसरे इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई किस हद तक प्रभावित हो सकती है और बीमा कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को कैसे समायोजित करती हैं।
यानी गुरुवार की भारी गिरावट के पीछे सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि कमीशन, डिस्ट्रीब्यूशन लागत और डिजिटल इंश्योरेंस बिक्री के पूरे मॉडल में संभावित बदलाव को लेकर बाजार की प्रतिक्रिया है।