लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित पीस डील को लेकर नया सियासी और कूटनीतिक टकराव सामने आ गया है। Donald Trump ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु मुद्दों को लेकर समझौता करीब है, लेकिन ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी पक्ष वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश कर रहा है।
ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान कई बड़े समझौतों के लिए तैयार हो गया है, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना टोल के जहाजों की आवाजाही और परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध शामिल हैं। लेकिन तेहरान ने साफ कहा कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई अहम मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं।
इस विवाद की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में यहां सैन्य तनाव, ड्रोन हमले और नौसैनिक गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हुआ है।
हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भी संकेत दिया है कि अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तीन संभावित रास्ते सामने हैं:
- सीमित समझौता: दोनों पक्ष अस्थायी युद्धविराम बढ़ाकर बातचीत जारी रखें।
- तनावपूर्ण गतिरोध: बातचीत चलती रहे लेकिन जमीनी स्तर पर छोटे सैन्य टकराव जारी रहें।
- फिर से बड़ा संघर्ष: अगर होर्मुज या परमाणु मुद्दे पर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई फिर तेज हो सकती है।
अभी तक जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे लगता है कि दोनों पक्ष बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं करना चाहते। हालांकि सार्वजनिक बयानों में दिख रही तल्खी यह भी बता रही है कि अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
मिडिल ईस्ट की यह खींचतान सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार, शिपिंग रूट्स और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर अब वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।