लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) के आंदोलन के पाँचवें दिन सुबह से ही छात्र कार्यकर्ता, पुलिसकर्मी, CJP सदस्य और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने पिछले चार दिनों की तरह ही अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखा और NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण 21 छात्रों की मृत्यु हुई और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की।
प्रदर्शन में यह भी कहा गया कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग छात्रों की मेहनत और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की।
सुरक्षा के मद्देनज़र भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद माहौल शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और नारों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग उठाई। कई लोगों ने सभा को संबोधित करते हुए आंदोलन के कारणों को विस्तार से बताया।
जब प्रदर्शन की अवधि और सफलता की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो कई प्रतिभागियों ने विश्वास जताया कि उनकी मांगें पूरी होंगी और जल्द समाधान निकलेगा। कुछ लोगों ने कहा कि वे छात्रों के समर्थन में आए हैं क्योंकि युवा देश का भविष्य हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाए और इसे वर्षों से जारी समस्या बताया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी चिंता जताई, जहां बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालय और साफ पानी की कमी बताई गई। साथ ही यह भी कहा गया कि सरकारी नौकरियों में सीटें कम हैं जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं। निजी शिक्षा की ऊंची लागत को भी एक बड़ी समस्या बताया गया।
इस आंदोलन में किसान यूनियन और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की भी भागीदारी रही। आयोजकों ने भोजन, पानी और ओपन लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। CJP के सदस्यों ने “इंकलाब ज़िंदाबाद” और “भारत माता की जय” जैसे नारे लगाए और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
कुछ छात्रों ने यह भी बताया कि उनके माता-पिता ने सुरक्षा कारणों से उन्हें जंतर-मंतर जाने से रोकने की कोशिश की।
इन सभी घटनाओं ने आंदोलन में एक और आयाम जोड़ा, जहाँ छात्रों और आयोजकों की बातचीत ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के महत्व को उजागर किया।