लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
रणथंभौर (राजस्थान): देश की अग्रणी वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ SOS को बाघ संरक्षण और अवैध शिकार के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने के लिए 'टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राजस्थान में आयोजित 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 के दौरान प्रदान किया गया।
यह पुरस्कार संस्था को भारत में बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा, शिकार विरोधी अभियानों तथा वन विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया। संस्था की ओर से इसके सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने यह सम्मान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में देश-विदेश के वन्यजीव विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं और संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान भारत में बाघ संरक्षण की उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
वाइल्डलाइफ SOS पिछले तीन दशकों से अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने, शिकारियों के नेटवर्क का भंडाफोड़ करने और वन विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था की एंटी-पोचिंग इकाई 'फॉरेस्ट वॉच' विभिन्न राज्यों में खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई कर वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने में सहयोग करती रही है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि यह पुरस्कार संस्था की पूरी टीम, वन विभाग के अधिकारियों और उन स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों का सम्मान है, जो वर्षों से बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी से ही सफल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों का मनोबल बढ़ाते हैं और लोगों में जैव विविधता तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।