लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 18 वर्ष पुराने भूमि अधिग्रहण विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए ग्रेटर नोएडा के 16 परिवारों के मकानों को अधिग्रहण से बाहर रखने का आदेश दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए कहा कि इन परिवारों ने लगभग दो दशक से न्यायिक संरक्षण में अपने घरों में निवास किया है, इसलिए उन्हें राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, बाकी भूमि का अधिग्रहण सार्वजनिक परियोजना के लिए वैध रहेगा।
यह मामला वर्ष 2007 में गौतम बुद्ध नगर जिले के इबादुल्लापुर उर्फ बादलपुर गांव की लगभग 230 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा था। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास के लिए भूमि अधिग्रहित की थी। प्रभावित परिवारों ने अपने आवास बचाने के लिए अदालत का रुख किया था और 2010 से उन्हें यथास्थिति का संरक्षण मिला हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इतने लंबे समय तक परिवार अपने घरों में रह रहे हैं और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह विकसित हो चुका है। ऐसे में केवल इन 16 आवासीय भूखंडों को अधिग्रहण से मुक्त करना न्यायसंगत होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार विकास प्राधिकरण से मूलभूत नागरिक सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए निर्धारित विकास शुल्क देना होगा।