लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
ओडिशा: पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध स्नान यात्रा 2026 का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष स्नान मंडप पर लाकर 108 पवित्र जल कलशों से स्नान कराया गया। इस अनुष्ठान के बाद भगवान को हाथी वेश (हाती बेशा) में सजाया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
स्नान यात्रा का धार्मिक महत्व बहुत गहरा माना जाता है। मान्यता है कि यह भगवान जगन्नाथ का जन्मोत्सव भी है और रथ यात्रा से पहले होने वाला पहला बड़ा अनुष्ठान है। इस दिन भक्त भगवान के सार्वजनिक दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह उत्सव हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
इस परंपरा की शुरुआत को लेकर जगन्नाथ परंपरा में मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ की मूर्तियों की स्थापना के बाद इस स्नान समारोह की शुरुआत कराई थी। स्कंद पुराण में भी इस अनुष्ठान का उल्लेख मिलता है। समय के साथ यह परंपरा ओडिशा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।
स्नान यात्रा के बाद जगन्नाथ परंपरा के अनुसार भगवान को कुछ समय के लिए विश्राम दिया जाता है, जिसे अनासरा काल कहा जाता है। इस दौरान भक्तों को नियमित दर्शन नहीं मिलते और कुछ समय बाद भगवान पुनः दर्शन देते हैं। इसके बाद विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारियां आगे बढ़ती हैं।
स्नान यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ओडिशा की सदियों पुरानी संस्कृति, आस्था और परंपरा का प्रतीक भी है। हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अनुष्ठान को देखने के लिए पुरी पहुंचते हैं।